जेलों में महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की रिपोर्ट साझा की, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और ईरान की आर्थिक बदहाली का भी किया दावा
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कई गंभीर दावे करते हुए उसकी आर्थिक स्थिति, सैन्य क्षमता और परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने ईरानी जेलों में बंद महिलाओं और युवतियों के साथ कथित यौन हिंसा और दुर्व्यवहार से जुड़ी एक रिपोर्ट भी सोशल मीडिया पर साझा की। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोपों को खारिज किया है और वाशिंगटन के आर्थिक दबाव अभियान को विफल बताया है।
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। इसमें ईरानी जेलों में हिरासत में रखी गई महिलाओं और युवतियों के साथ कथित यौन हिंसा, पूछताछ के दौरान हमले और सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार के आरोपों का उल्लेख किया गया था। ट्रंप की ओर से रिपोर्ट साझा किए जाने के बाद ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर भी बहस तेज हो गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं किया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा
ट्रंप ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग पर अब पूरी तरह अमेरिका का नियंत्रण है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन फिलहाल तेहरान जिस तरह का समझौता चाहता है, उसे स्वीकार करने के लिए अमेरिका तैयार नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इस जलमार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी ट्रंप का निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर भी बेहद गंभीर दावे किए। ट्रंप के मुताबिक, ईरान आर्थिक संकट से गुजर रहा है और उसके पास पुलिस तथा सैन्यकर्मियों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त धन नहीं है।
उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसके पास प्रभावी नौसेना और वायुसेना नहीं है। ट्रंप ने ईरान में महंगाई दर 350 प्रतिशत तक पहुंचने का भी दावा किया। हालांकि, इन दावों के समर्थन में उनके बयान में कोई विस्तृत आंकड़ा या स्वतंत्र स्रोत प्रस्तुत नहीं किया गया।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का सख्त रुख
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिका की नीति स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने या रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर आशंकाएं व्यक्त करते रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने में सक्षम होता है तो इससे इजरायल और क्षेत्र के अन्य देशों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
इसी नीति के तहत अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर जोर दे रहा है। ट्रंप अपने इस अभियान को व्यापक आर्थिक दबाव और ‘आर्थिक क्रांति’ के रूप में पेश कर रहे हैं।
अराघची का पलटवार—‘अमेरिकी दबाव पहले भी विफल रहा’
अमेरिकी दबाव के जवाब में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने वाशिंगटन की रणनीति को सीधे तौर पर चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि ईरान पहले भी लंबे समय तक कठोर अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर चुका है और ऐसे दबाव तेहरान को झुकाने में सफल नहीं हुए।
अराघची के मुताबिक, करीब 14 वर्ष पहले लगाए गए बेहद कड़े प्रतिबंध विफल रहे। इसके बाद करीब आठ वर्ष पहले अमेरिका ने ‘अधिकतम दबाव’ की नीति अपनाई, लेकिन वह भी अपने उद्देश्य को हासिल नहीं कर सकी।
उन्होंने हाल के महीनों में ईरान पर बिना शर्त आत्मसमर्पण के लिए दबाव बनाने के कथित अमेरिकी प्रयास का भी उल्लेख किया और इसे विफल बताया।
‘सबसे विनाशकारी आर्थिक अभियान भी विफल होगा’
अराघची ने कहा कि अमेरिका की ओर से चलाया जा रहा मौजूदा आर्थिक दबाव अभियान भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं होगा। उनके अनुसार, ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने का तरीका पुराना है और इसमें धमकी की राजनीति दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि तरीका भले ही पुराना हो, लेकिन इस बार उसे लागू करने वाले लोग अलग हैं।
