सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी के दो साल के प्रयास के बाद सामने आया आय-व्यय का ब्योरा, मेले के खर्चों को लेकर पारदर्शिता पर उठे सवाल
भीमताल (नैनीताल)। नगर पालिका परिषद भीमताल के हरेला मेला 2024 के आय-व्यय का हिसाब आखिरकार करीब दो साल बाद सार्वजनिक हो गया है। नगर पालिका की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट में मेले से 22 लाख 13 हजार 778 रुपये की आय दिखाई गई है, जबकि आयोजन पर 25 लाख 98 हजार 287 रुपये खर्च किए गए। इस तरह मेले की आय की तुलना में 3 लाख 84 हजार 509 रुपये अधिक खर्च हुआ। आय-व्यय का यह अंतर सामने आने के बाद अब खर्च की विभिन्न मदों और घाटे की भरपाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी की ओर से मेले के आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक किए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। उनके अनुसार, करीब दो साल तक लगातार प्रयास और पत्राचार के बाद अब नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राहुल कुमार सिंह की ओर से 22 अगस्त 2026 को आय-व्यय का विवरण उपलब्ध कराया गया है।
नगर पालिका की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक हरेला मेले से कुल 22,13,778 रुपये की आय हुई। इसमें निविदा बिक्री से 64,428 रुपये, मनोरंजन उपकरणों से 3 लाख 25 हजार रुपये और दुकान किराये से सबसे अधिक 18 लाख 24 हजार 350 रुपये की आय दर्ज की गई है।
मेले में इन मदों पर हुआ सबसे ज्यादा खर्च
रिपोर्ट में मेले के आयोजन पर कुल 25,98,287 रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। खर्च की प्रमुख मदों में टीन शेड दुकान निर्माण पर 5 लाख रुपये, सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर 3 लाख 86 हजार 900 रुपये, विद्युत एवं साउंड व्यवस्था पर 3 लाख 36 हजार 300 रुपये तथा सफाई व्यवस्था पर 2 लाख 95 हजार रुपये खर्च होना बताया गया है।
इसके अलावा आयोजन से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं पर भी पालिका की ओर से खर्च किया गया। आय और व्यय के आंकड़ों को मिलाने पर साफ है कि मेले से प्राप्त आय की तुलना में पालिका को 3,84,509 रुपये अधिक खर्च करने पड़े।
दो साल तक हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ?
आय-व्यय का विवरण सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मेले का आयोजन 2024 में हुआ था तो उसका पूरा वित्तीय विवरण तत्काल सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी का कहना है कि जनता के पैसे और नगर पालिका के संसाधनों से होने वाले आयोजनों का हिसाब जनता के सामने समय पर आना चाहिए।
बृजवासी ने कहा कि पिछले दो अधिकारियों के तबादले के बाद अब जाकर आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक हो पाया है। उन्होंने वर्तमान अधिशासी अधिकारी राहुल कुमार सिंह का रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए आभार जताते हुए कहा कि इससे कम से कम मेले के खर्च का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आया है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक, दो साल तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है।
₹5 लाख के टीन शेड पर भी उठे सवाल
हरेला मेले के खर्च में टीन शेड दुकान निर्माण पर पांच लाख रुपये खर्च किए जाने की मद भी चर्चा में है। बृजवासी ने सवाल उठाया कि इस निर्माण से वर्तमान में स्थानीय लोगों अथवा नगर पालिका को कितना लाभ मिल रहा है और इसकी उपयोगिता क्या है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से किए गए प्रत्येक निर्माण और खर्च का उद्देश्य तथा उससे मिलने वाला लाभ स्पष्ट होना चाहिए।
भविष्य में 15 दिन के भीतर हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
पूरन बृजवासी ने मांग की है कि भविष्य में नगर पालिका की ओर से आयोजित होने वाले किसी भी मेले या बड़े सार्वजनिक आयोजन का आय-व्यय विवरण अधिकतम 15 दिन के भीतर सार्वजनिक किया जाए। इसके लिए नगर पालिका की वेबसाइट, कार्यालय के सूचना पट और स्थानीय समाचार पत्रों में विवरण प्रकाशित करने की व्यवस्था की जाए।
उनका कहना है कि समय पर आय-व्यय सार्वजनिक होने से न केवल जनता को जानकारी मिलेगी, बल्कि नगर पालिका की वित्तीय व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता और भरोसा भी मजबूत होगा।
