THDC टनल हादसा: आठवीं मौत के बाद भी जारी है रेस्क्यू, दो श्रमिकों की तलाश में जुटीं टीमें

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चमोली। विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की हाट-सियासैण, मायापुर स्थित निर्माणाधीन टेल रेस टनल में 13 अगस्त को हुए दर्दनाक हादसे के बाद तीसरे दिन भी राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। शनिवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक और श्रमिक का शव टनल से बाहर निकाला गया। शव की चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टरों ने श्रमिक देवनाथ को मृत घोषित कर दिया। इसके साथ ही हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। वहीं टनल में फंसे दो अन्य श्रमिकों की तलाश अभी भी जारी है।

रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर जमा पानी और कठिन परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, जिला प्रशासन और परियोजना से जुड़ी टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। टनल में पानी की निकासी के लिए सक्शन पंप समेत अन्य आवश्यक उपकरण लगाए गए हैं, ताकि बचाव दलों की आवाजाही आसान हो सके और उन स्थानों तक पहुंच बनाई जा सके, जहां लापता श्रमिकों के मौजूद होने की संभावना है।

22 श्रमिक थे टनल में, 12 बाहर निकाले गए

प्रशासन के अनुसार हादसे के समय टनल में कुल 22 श्रमिक मौजूद थे। इनमें से 12 श्रमिकों को बाहर निकाला जा चुका है। आठ श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दो श्रमिक अभी भी लापता हैं। लापता श्रमिकों को तलाशने के लिए टनल के भीतर संभावित सभी स्थानों पर सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

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रेस्क्यू अभियान के दौरान शनिवार को देवनाथ को बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी हालत गंभीर थी। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक और श्रमिक का शव बरामद होने से परिजनों और रेस्क्यू टीमों के सामने चिंता और बढ़ गई है। अब बचाव दलों का पूरा फोकस टनल में लापता दो श्रमिकों तक पहुंचने पर है।

पानी बना चुनौती, सक्शन पंप से तेज की जा रही निकासी

टनल के अंदर लगातार जमा हो रहे पानी के कारण रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बचाव दलों ने पानी की निकासी के लिए सक्शन पंप और अन्य तकनीकी उपकरण लगाए हैं। अधिकारियों का मानना है कि पानी का स्तर कम होने से टनल के भीतर आगे बढ़ने और संभावित स्थानों की तलाशी लेने में मदद मिलेगी।

रेस्क्यू टीमों द्वारा पानी निकालने के साथ-साथ टनल के भीतर सुरक्षित आवाजाही के लिए रास्ता बनाने का काम भी किया जा रहा है। अभियान में उपलब्ध मशीनरी और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मौके पर पहुंचे मंत्री मदन कौशिक, अधिकारियों को दिए तेजी के निर्देश

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक शनिवार को हादसा स्थल पर पहुंचे और पूरे रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और बचाव दलों से बातचीत कर अभियान की प्रगति की जानकारी ली। मंत्री ने कहा कि टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक की जान बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार की प्राथमिकता सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। उन्होंने रेस्क्यू टीमों को उपलब्ध संसाधनों और मशीनरी का बेहतर समन्वय करते हुए अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए।

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मदन कौशिक ने टनल में पानी की निकासी, मशीनरी की स्थिति और रेस्क्यू टीमों की आवाजाही की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बचाव दलों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जाए।

परिजनों को मिलेगी प्रमाणिक जानकारी

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लापता श्रमिकों के परिजनों को रेस्क्यू अभियान से जुड़ी सही और प्रमाणिक जानकारी समय-समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में प्रशासन को प्रभावित परिवारों के साथ संवेदनशीलता के साथ खड़ा रहना होगा।

मौके पर जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश समेत जिला प्रशासन, पुलिस और विभिन्न रेस्क्यू एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।

मृतकों के परिजनों को 5 लाख, घायलों को 1 लाख रुपये

हादसे के बाद टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने मृतकों और घायलों के लिए अनुग्रह राशि की घोषणा की है। कंपनी प्रत्येक मृतक श्रमिक के निकटतम परिजन को 5 लाख रुपये और प्रत्येक घायल श्रमिक को 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देगी।

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टीएचडीसीआईएल प्रबंधन ने हादसे में हुई जनहानि पर गहरा दुख जताते हुए मृत श्रमिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। कंपनी ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में वह प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

धामी ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे की वजहों का पता लगाने के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में निर्माण परियोजनाओं में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

धामी ने स्पष्ट कहा कि निर्माण परियोजनाओं में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को रेस्क्यू अभियान को पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

अब दो श्रमिकों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती

हादसे के बाद अब प्रशासन और बचाव एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल में लापता दो श्रमिकों तक पहुंचना है। पानी की निकासी के साथ टनल के भीतर संभावित स्थानों पर सर्च अभियान लगातार चलाया जा रहा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तकनीकी संसाधनों की मदद से एक-एक हिस्से की जांच कर रही हैं।

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