तेहरान: दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को ईरानी बलों द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग किए जाने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि पहले एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया गया और फिर कुछ ही देर बाद दूसरे जहाज पर भी गोलियां चलाई गईं। ईरानी मीडिया का दावा है कि जहाजों ने चेतावनी का पालन नहीं किया, जिसके चलते कार्रवाई की गई। जिन जहाजों को कब्जे में लिया गया, उनमें ‘एमएससी फ्रांसिस्का’ और ‘एपामिनोड्स’ शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि तीसरे जहाज ‘यूफोरिया’ पर भी हमले की खबर है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी और बातचीत की उम्मीद जताई थी। हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखने के फैसले से तेहरान नाराज है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक यह घेराबंदी खत्म नहीं होती, वह किसी भी शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा।
आम आदमी पर असर
होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद करीब 35% बढ़ोतरी दर्शाती है। तेल-गैस महंगी होने से परिवहन लागत बढ़ रही है, जिसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।
कूटनीति ठप, युद्ध जारी
इस बीच पाकिस्तान शांति वार्ता की मेजबानी को तैयार है, लेकिन ईरान ने अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने की पुष्टि नहीं की है। कूटनीतिक स्तर पर गतिरोध कायम है और क्षेत्र में तनाव कम होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
बढ़ता मानवीय संकट
28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब बड़े मानवीय संकट का रूप ले चुका है। आंकड़ों के अनुसार, ईरान में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान और अन्य क्षेत्रों में भी भारी जनहानि हुई है।
ईरान के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि वे दुश्मनों को “कल्पना से परे” जवाब देंगे। ऐसे में जब तक कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक समुद्र से लेकर जमीनी मोर्चों तक तनाव जारी रहने की आशंका बनी हुई है।
