1 अप्रैल से बदल जाएंगे टैक्स के नियम: नया इनकम टैक्स एक्ट लागू, ITR की डेडलाइन बढ़ी, F&O ट्रेडर्स पर STT का बोझ

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट 2026 के बाद देश में टैक्स व्यवस्था में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। 1 अप्रैल 2026 से कई नए नियम लागू होंगे, जिनका सीधा असर आम करदाताओं, कारोबारियों और शेयर बाजार के निवेशकों पर पड़ेगा। सरकार ने जहां टैक्स नियमों को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं, वहीं कुछ मामलों में सख्ती भी बढ़ाई गई है।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि दशकों से लागू Income Tax Act, 1961 की जगह अब Income Tax Act, 2025 लागू किया जाएगा। यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और इसके तहत कई प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ITR फाइल करने की तारीख में बड़ी राहत

सरकार ने कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत देते हुए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी है। जिन करदाताओं का ऑडिट नहीं होता, उनके लिए ITR‑3 और ITR‑4 दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 31 अगस्त कर दी गई है।

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हालांकि नौकरीपेशा और सामान्य करदाताओं के लिए ITR‑1 और ITR‑2 भरने की आखिरी तारीख पहले की तरह 31 जुलाई ही रहेगी। इसके अलावा टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा 31 अक्टूबर ही बनी रहेगी।

रिवाइज्ड रिटर्न के लिए मिला ज्यादा समय

अगर किसी करदाता से रिटर्न दाखिल करते समय गलती हो जाती है तो अब उसे सुधारने के लिए अधिक समय मिलेगा। पहले रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर होती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर संबंधित वित्त वर्ष की 31 मार्च कर दिया गया है।

हालांकि 31 दिसंबर के बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क या पेनल्टी देनी होगी। वहीं बेलाटेड रिटर्न भरने की समय सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

TCS दरों में बड़ा फेरबदल

सरकार ने Tax Collected at Source (TCS) से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। 1 अप्रैल से शराब, कबाड़ और खनिज (कोयला, लौह अयस्क आदि) की बिक्री पर टीसीएस दर 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है।

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इसके विपरीत तेंदू पत्ते की बिक्री पर टीसीएस 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। विदेश में पैसे भेजने के मामलों में भी राहत दी गई है और Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत भेजी जाने वाली रकम पर टीसीएस दर को एक समान 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

F&O ट्रेडर्स पर बढ़ा टैक्स का बोझ

शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए नया नियम झटका साबित हो सकता है। सरकार ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाने का फैसला किया है।

अब फ्यूचर्स पर STT 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया जाएगा, जबकि ऑप्शंस के लेनदेन पर यह टैक्स 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे सक्रिय ट्रेडर्स की लागत में बढ़ोतरी होगी।

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शेयर बायबैक और डिविडेंड इनकम पर नई सख्ती

सरकार ने कंपनियों के शेयर बायबैक को लेकर भी नियमों में बदलाव किया है। अब 1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को ‘कैपिटल गेन्स’ के रूप में टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। पहले इसे ‘डीम्ड डिविडेंड’ माना जाता था।

इसके अलावा डिविडेंड इनकम और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर ब्याज खर्चों की 20 प्रतिशत कटौती की जो छूट पहले मिलती थी, उसे भी खत्म कर दिया गया है। अब इस आय पर निवेशकों को अपने टैक्स स्लैब के अनुसार पूरा टैक्स देना होगा।

इन नए नियमों के लागू होने के बाद आने वाले वित्त वर्ष में टैक्स प्लानिंग का तरीका भी बदल सकता है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि करदाताओं को पहले से ही अपनी वित्तीय रणनीति की समीक्षा कर लेनी चाहिए।

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