RBI ने लगातार तीसरी बार नहीं बदली रेपो रेट, 5.25% पर बरकरार…जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ाया

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बाजार की उम्मीदों के अनुरूप लगातार तीसरी बार नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला लिया। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी ‘तटस्थ’ (Neutral) बनाए रखा है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन के कारण आर्थिक गतिविधियों को लगातार समर्थन मिल रहा है तथा अप्रैल-जून तिमाही का प्रदर्शन आरबीआई के अनुमान से बेहतर रहा है।

पश्चिम एशिया संकट और महंगाई पर आरबीआई की नजर

गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और अल-नीनो से जुड़े जोखिम आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष प्रमुख व्यापारिक मार्गों को प्रभावित कर रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

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आरबीआई के अनुसार, निकट भविष्य में कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के कारण खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि, तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि महंगाई में मौजूदा बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की कीमतों की वजह से है और इसका व्यापक असर अभी नहीं दिख रहा है।

जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ा, महंगाई का अनुमान घटा

आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, सीपीआई आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

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गवर्नर ने बताया कि जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है। इसके साथ ही ऋण वृद्धि भी मजबूत और व्यापक आधार वाली है, जिससे वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रहने की संभावना है।

रुपये पर दबाव, कच्चे तेल और डॉलर बना चुनौती

आरबीआई ने चेताया कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताएं भारत के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।

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इस बीच भारतीय रुपया भी दबाव में बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 से 96 रुपये प्रति डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है। वर्ष 2026 में अब तक रुपया करीब 7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है, जबकि फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद से इसमें लगभग 6 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट दर्ज की गई है।

क्या होगा आम लोगों पर असर?

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से फिलहाल बैंकों की होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में तत्काल बदलाव की संभावना कम है। वहीं, जमा योजनाओं (एफडी) पर भी मौजूदा ब्याज दरें फिलहाल बरकरार रह सकती हैं। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वैश्विक परिस्थितियों और महंगाई के रुख पर आगे की नीतियां निर्भर करेंगी।

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