नई दिल्ली। देश में ईंधन की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है। निजी ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें शनिवार तड़के से लागू हो गई हैं।
कंपनी की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान का भी वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ा है।
मार्च के बाद फिर बढ़ाए दाम
इस साल ईरान संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद नायरा एनर्जी ने पहली बार 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। तब पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया था। इसके बाद कंपनी के पंपों पर पेट्रोल की कीमत 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गई थी।
इसके बाद मई के अंत तक सरकारी तेल कंपनियों ने भी अलग-अलग चरणों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद नायरा ने 1 जुलाई को पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः 5 रुपये और 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे। अब कंपनी ने एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी की है।
सरकारी और निजी पंपों पर अलग हो सकते हैं दाम
देश में पेट्रोल पंपों के नेटवर्क पर सरकारी तेल कंपनियों का दबदबा है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पास देश के कुल 1,04,137 पेट्रोल पंपों में से 90 प्रतिशत से अधिक हैं।
वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की बीपी के संयुक्त उपक्रम जियो-बीपी के पास 2,304 पेट्रोल पंप हैं। जियो-बीपी ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। ऐसे में नायरा की ओर से कीमतें बढ़ाए जाने के बाद अलग-अलग कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों में अंतर बढ़ सकता है।
सरकार ने निजी कंपनियों से बिक्री सीमित नहीं करने को कहा
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब 1 अक्टूबर को सरकार ने निजी ईंधन विक्रेताओं से अपने पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री सीमित नहीं करने को कहा था।
इससे पहले नायरा और जियो-बीपी ने खुदरा बिक्री में नुकसान के बीच कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री की मात्रा सीमित की थी। अधिकारियों के मुताबिक, खुदरा और थोक डीजल की कीमतों के बीच अंतर के चलते औद्योगिक उपभोक्ता सस्ता डीजल खरीदने के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे खुदरा पंपों पर आपूर्ति का दबाव बढ़ रहा था।
तेल कंपनियों पर बढ़ा लागत का दबाव
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि सितंबर में खुदरा ईंधन कीमतों के स्थिर रहने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था।
इक्रा के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री को मिलाकर कंपनियों को प्रतिदिन करीब 530 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। एजेंसी ने कहा था कि तेल कंपनियों के शोधन और विपणन कारोबार का संतुलन कच्चे तेल की कीमत करीब 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल रहने पर बनता है। इससे ऊपर कीमत जाने और खुदरा दाम स्थिर रहने पर कंपनियों का नुकसान बढ़ सकता है।
आगे महंगाई पर भी पड़ सकता है असर
नायरा की ओर से कीमतें बढ़ाए जाने से फिलहाल निजी और सरकारी पेट्रोल पंपों के बीच ईंधन की कीमतों का अंतर बढ़ सकता है। अगर दूसरी कंपनियां भी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो पेट्रोल-डीजल महंगा होने से माल ढुलाई और परिचालन लागत बढ़ सकती है।

