नैनीताल। पहाड़ों में गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव का समय कई चुनौतियां लेकर आता है। गांव से अस्पताल की लंबी दूरी, घुमावदार पहाड़ी सड़कें और रास्ते में लगने वाला जाम कभी-कभी स्थिति को गंभीर बना देता है। ऐसे में बर्थ वेटिंग होम दूरदराज की गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। जिला अल्मोड़ा के विशालकोट की भावना इसका उदाहरण हैं, जो प्रसव की संभावित तिथि नजदीक आने पर अपने गांव से करीब 32 किलोमीटर का सफर तय कर गरमपानी पहुंचीं और बर्थ वेटिंग होम में ठहरीं। इसके बाद गरमपानी स्वास्थ्य केंद्र में उनका सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया।
32 किलोमीटर की दूरी, लेकिन प्रसव के समय नहीं हुई परेशानी
विशालकोट निवासी भावना के लिए प्रसव के समय सबसे बड़ी चिंता अस्पताल तक समय पर पहुंचने की थी। उनका गांव गरमपानी से करीब 32 किलोमीटर दूर है। ऐसे में प्रसव की संभावित तिथि नजदीक आने पर स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें गरमपानी स्थित बर्थ वेटिंग होम में ठहराया।
अस्पताल के नजदीक रहने से भावना को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ी। स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय निगरानी के बीच उनका सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया।
16 और 14 किमी दूर से आईं महिलाएं भी बनीं लाभार्थी
भावना अकेली नहीं हैं। सिल्टोना की हीरा देवी करीब 16 किलोमीटर की दूरी तय कर गरमपानी पहुंचीं। वहीं कोरल होल्स की कल्पना और हेमा देवी करीब 14 किलोमीटर दूर से बर्थ वेटिंग होम में ठहरीं। इन सभी महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया और गरमपानी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराया।
इन मामलों ने यह भी दिखाया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बर्थ वेटिंग होम सिर्फ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा बन सकते हैं।
कैंची धाम क्षेत्र में जाम को लेकर विशेष सतर्कता
कैंची धाम क्षेत्र में बढ़ते यातायात और संभावित जाम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं को लेकर विशेष तैयारी शुरू की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विशेष रूप से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की समय से पहचान की जाए।
ऐसी महिलाओं को उनकी जरूरत के अनुसार प्रसव की संभावित तिथि से पहले बर्थ वेटिंग होम में ठहराने की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि किसी आपात स्थिति में उन्हें अस्पताल पहुंचाने में समय बर्बाद न हो।
आशा और एएनएम को दी गई जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को भी जिम्मेदारी दी है कि वे गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को बर्थ वेटिंग होम की सुविधा के बारे में जानकारी दें। जरूरतमंद महिलाओं को समय रहते बर्थ वेटिंग होम पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है।

डॉ. रश्मि पंत ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। बर्थ वेटिंग होम के माध्यम से प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को प्रसव के समय दूरी, यातायात और जाम जैसी परेशानियों का सामना न करना पड़े और उन्हें समय पर सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

