ग्वालियर: Gwalior में सामने आए चर्चित ‘लुटेरी दुल्हन’ मामले में पुलिस जांच के दौरान हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। शादी के महज तीन दिन बाद दुल्हन के मोबाइल में मिली वॉट्सऐप चैट ने पूरे षड्यंत्र की परतें खोल दीं। जिस युवक को दुल्हन का मुंहबोला भाई बताकर रिश्ता कराया गया था, वह उसका असली पति निकला।
मामला नाका चंद्रवदनी क्षेत्र निवासी रतन शर्मा से जुड़ा है, जो Jabalpur के एक निजी अस्पताल में टीम लीडर के पद पर कार्यरत हैं। रतन की शादी राधा उर्फ दीक्षा मुद्गल नाम की युवती से कराई गई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन शादी के बाद दुल्हन की गतिविधियों ने रतन को शक में डाल दिया।
बताया गया कि राधा कई बार मोबाइल पर छिपकर बातें करती थी और उसका व्यवहार संदिग्ध लग रहा था। एक रात जब राधा सो गई तो रतन ने उसका मोबाइल चेक किया। मोबाइल में अजय उर्फ सोनू चौहान नाम के युवक से निजी चैट मिली। बातचीत का अंदाज पति-पत्नी जैसा था। चैट पढ़ते ही रतन के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि यही युवक शादी के दौरान खुद को दुल्हन का भाई बता रहा था।
इसके बाद रतन ने तुरंत हंगामा करने के बजाय पूरी सच्चाई जानने का फैसला किया। अगले तीन दिनों तक उसने चुपचाप दुल्हन की गतिविधियों पर नजर रखी और कई अहम सबूत जुटाए। बाद में वह पुलिस के पास पहुंचा, जिसके बाद पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अजय चौहान और राधा उर्फ दीक्षा ने वर्ष 2024 में Agra के एक आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह किया था। अजय पहले से शादीशुदा है। उसकी पहली पत्नी अनीता और बच्चे भी हैं। जब पहली पत्नी को दूसरी शादी की जानकारी मिली तो उसने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद अजय ने परिवार के साथ मिलकर दीक्षा की किसी दूसरे युवक से शादी कराने और उसे ठगने की साजिश रची।
रतन शर्मा इस गिरोह का शिकार बने। आरोपियों ने दीक्षा को गरीब और अनाथ बताकर सहानुभूति हासिल की। शादी से पहले ब्यूटी पार्लर और रिटर्न गिफ्ट के नाम पर रतन से 50 हजार रुपये नकद लिए गए, जबकि शादी में करीब छह लाख रुपये खर्च कराए गए।
पुलिस के अनुसार गिरोह की योजना थी कि शादी के कुछ महीनों बाद दीक्षा घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना का झूठा मामला दर्ज कराएगी। इसके बाद समझौते के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाते।
Gwalior Police ने इस मामले में मुख्य आरोपी अजय चौहान और राधा उर्फ दीक्षा को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं अजय की मां माया देवी, बहन शिल्पी परमार, जीजा राघवेंद्र परमार, भाई सत्येंद्र चौहान और सोनू तिवारी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
एसएसपी Dharmveer Singh के निर्देश पर पुलिस की टीमें Morena और आगरा समेत कई स्थानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह पहले भी कई युवकों को इसी तरह अपना शिकार बना चुका है। पुराने मामलों की भी जांच शुरू कर दी गई है।

