ईरान युद्ध नहीं चाहता था, बातचीत के दौरान हुआ हमला: डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान कभी युद्ध नहीं चाहता था और मौजूदा संघर्ष की शुरुआत उस समय हुई जब ईरान बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा था।

एक निजी समाचार एजेंसी से बातचीत में इलाही ने कहा कि क्षेत्र में पैदा हुए हालात के लिए ईरान जिम्मेदार नहीं है। उनके अनुसार जब वार्ता की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान उन पर हमला कर दिया गया, जिसके बाद हालात युद्ध जैसी स्थिति में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी लोगों की पीड़ा, या गैस, पेट्रोल और तेल की कमी जैसी स्थितियों से खुश नहीं हो सकता। ईरान शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना उसका अधिकार भी है और मजबूरी भी।

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वैश्विक नेताओं से अमेरिका पर दबाव बनाने की अपील

इलाही ने दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे United States पर दबाव बनाएं ताकि युद्ध को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का सबसे अधिक असर आम लोगों पर पड़ रहा है और वैश्विक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि शांति बहाल करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को निर्बाध अनुमति

भारतीय जहाजों के आवागमन को लेकर पूछे गए सवाल पर इलाही ने कहा कि Strait of Hormuz से भारतीय जहाजों के गुजरने में कोई बाधा नहीं होगी। उन्होंने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरानी दूतावास ने कुछ भारतीय जहाजों को इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने में मदद करने का प्रयास भी किया था।

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जवाबी हमलों पर आलोचना का जवाब

ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में किए जा रहे जवाबी हमलों पर उठ रहे सवालों के बीच इलाही ने कहा कि United States ईरान से हजारों मील दूर है, लेकिन उसने ईरान के आसपास कई सैन्य ठिकाने बना रखे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने क्षेत्र में करीब 45 ठिकाने स्थापित किए हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए किया जा रहा है।

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इलाही के मुताबिक युद्ध से पहले ईरान ने पड़ोसी देशों से अनुरोध किया था कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें। उन्होंने आरोप लगाया कि Bahrain से दागी गई मिसाइलों में बड़ी संख्या में निर्दोष लोग मारे गए। ऐसी स्थिति में ईरान के पास अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

उन्होंने दोहराया कि ईरान का उद्देश्य युद्ध करना नहीं है, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।

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