भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को रफ्तार: डीएलआई स्कीम के तहत 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

खबर शेयर करें

नई दिल्ली। भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) स्कीम के अंतर्गत सरकार ने 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। ये प्रोजेक्ट्स वीडियो निगरानी, ड्रोन पहचान प्रणाली, स्मार्ट एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और आईओटी आधारित सिस्टम-ऑन-चिप्स (SoC) जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों से जुड़े हैं।

रविवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि इसके साथ ही 95 कंपनियों को इंडस्ट्री-लेवल इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे चिप डिजाइन स्टार्टअप्स और एमएसएमई को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी संसाधन मिल सकेंगे।

यह भी पढ़ें 👉  विनय त्यागी फायरिंग मामला: लापरवाही पर एसएसपी की सख्त कार्रवाई, एसआई समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित

सरकार के अनुसार, चिप डिजाइन सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का सबसे महत्वपूर्ण और अधिक मूल्य जोड़ने वाला हिस्सा है। यह पूरी सप्लाई चेन में करीब 50 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि फैबलेस सेगमेंट के जरिए वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में इसकी हिस्सेदारी 30–35 प्रतिशत तक है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: नवरात्र पर कुट्टू आटा बिक्री के लिए सख्त नियम, बिना लाइसेंस नहीं होगी पैकिंग व बिक्री

डीएलआई स्कीम के तहत चल रही परियोजनाओं ने तेजी से प्रगति की है। अब तक 16 टेप-आउट, 6 एएसआईसी चिप्स, 10 पेटेंट और 1,000 से अधिक इंजीनियरों की भागीदारी दर्ज की जा चुकी है। साथ ही निजी निवेश में भी तीन गुना तक बढ़ोतरी हुई है।

यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित की जा रही है, जिसका कुल बजट 76,000 करोड़ रुपये है। योजना का उद्देश्य सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ घरेलू चिप डिजाइन इकोसिस्टम को सशक्त बनाना है।

यह भी पढ़ें 👉  नए साल का पहला मिशन: 12 जनवरी को PSLV-C62 से उड़ेगा इसरो का उन्नत निगरानी उपग्रह EOS-N1

इसके अलावा चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम के जरिए देशभर के शिक्षण संस्थानों में 85,000 से अधिक इंजीनियरिंग, मास्टर्स और पीएचडी छात्रों को चिप डिजाइन में प्रशिक्षित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि मजबूत फैबलेस क्षमता से भारत न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक सेमीकंडक्टर नेतृत्व की ओर भी अग्रसर होगा।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page