Haldwani: वाहन पंजीकरण में अवैध वसूली पर सख्ती, बजरंग ऑटो की कार्यप्रणाली नियमों के खिलाफ, नोटिस जारी

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हल्द्वानी। वाहन खरीदते समय उपभोक्ताओं से अवैध और मनमाने शुल्क वसूलने के मामलों पर अब परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। हल्द्वानी आरटीओ कार्यालय ने रामपुर रोड स्थित बजरंग ऑटो की कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से नियमों के विपरीत पाया है। यह कार्रवाई सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत संख्या CMHL-112025-11-886908 के आधार पर की गई है, जो उपभोक्ता चन्द्रशेखर जोशी द्वारा दर्ज कराई गई थी।

Illegal Charges Under Scanner: शिकायत में चन्द्रशेखर जोशी ने आरोप लगाया कि वाहन डीलर द्वारा रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनसे ₹8777 की मांग की गई, जबकि जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरटीओ में वास्तविक रूप से केवल ₹7147 ही जमा किए गए। यानी डीलर द्वारा ₹1630 की अतिरिक्त और अवैध वसूली का प्रयास किया गया। जब शिकायतकर्ता ने इस अतिरिक्त राशि को देने से इनकार किया, तो बजरंग ऑटो ने नियमों को दरकिनार करते हुए पूरी पंजीयन फाइल उपभोक्ता के हाथ में थमा दी और स्वयं आरटीओ कार्यालय में फाइल प्रस्तुत करने से पीछे हट गया।

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आरटीओ के आदेशों का खुला उल्लंघन

यह कृत्य आरटीओ कार्यालय के स्पष्ट निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि सम्भागीय परिवहन अधिकारी द्वारा आयोजित बैठक में, पत्र संख्या 1983/कर पंजीयन/2025 (दिनांक 03.06.2025) और 297/कर पंजीयन/2025 (दिनांक 12.09.2025) के माध्यम से सभी वाहन डीलरों को स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि नए वाहनों की पंजीयन फाइल डीलर स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से ही आरटीओ कार्यालय में प्रस्तुत करेगा, उपभोक्ता से कर और निर्धारित फीस के अतिरिक्त किसी भी प्रकार का अनावश्यक या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

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इन निर्देशों के बावजूद बजरंग ऑटो ने न केवल अतिरिक्त शुल्क की मांग की, बल्कि अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए पंजीयन प्रक्रिया का बोझ उपभोक्ता पर डाल दिया, जो उपभोक्ता अधिकारों का स्पष्ट हनन माना जा रहा है।

    आरटीओ ने जारी किया नोटिस

    हल्द्वानी आरटीओ कार्यालय ने मामले को गंभीर मानते हुए डीलर की कार्रवाई को अनियमित, अनुचित और उपभोक्ता शोषण की श्रेणी में रखा है। विभाग की ओर से बजरंग ऑटो को नोटिस जारी कर दिया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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    उपभोक्ता हितों पर बड़ा सवाल

    यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर कितने वाहन खरीदार डीलरशिप के इस अवैध शुल्क तंत्र का शिकार हो रहे हैं और नियामक व्यवस्था की निगरानी कितनी प्रभावी है। शिकायतकर्ता चन्द्रशेखर जोशी का कहना है कि यह मामला केवल उनकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि उपभोक्ता हित और पारदर्शिता से जुड़ा विषय है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई और सख्त नियंत्रण व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जाए, ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं का शोषण रोका जा सके।

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