Haldwani: पोकस तकनीक से मरीजों का इलाज होगा और तेज व सटीक, STH में चिकित्सकों को मिला प्रशिक्षण

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हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय (एसटीएच) में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को लेकर महत्वपूर्ण पहल की गई। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के मेडिसिन विभाग द्वारा इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन अकादमिक आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत “पोकस इन मेडिसिन एंड रूमेटोलॉजी” विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में चिकित्सकों, पीजी रेजिडेंट्स और मेडिकल छात्रों को आधुनिक चिकित्सा में तेजी से उपयोग हो रही पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड (POCUS) तकनीक की उपयोगिता और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने इसे आपातकालीन चिकित्सा और जोड़ों के रोगों के उपचार में एक क्रांतिकारी तकनीक बताया।

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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक एवं रूमेटोलॉजी विभाग के प्रभारी प्रोफेसर डॉ. घनश्याम पांगती रहे। उन्होंने बताया कि पोकस तकनीक के जरिए मरीजों की जांच सीधे बेडसाइड पर की जा सकती है, जिससे गंभीर मरीजों के इलाज में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह तकनीक फेफड़ों की बीमारियों, हृदय संबंधी समस्याओं, आंतरिक रक्तस्राव की पहचान और आईसीयू में उपचार प्रक्रियाओं के दौरान बेहद कारगर साबित हो रही है। इसके अलावा रूमेटोलॉजी के क्षेत्र में गठिया, जोड़ों की सूजन और अन्य जटिल रोगों की शुरुआती पहचान में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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डॉ. पांगती ने चिकित्सकों को लाइव डेमो और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी भी दी। कार्यशाला के दौरान मौजूद चिकित्सकों और छात्रों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को लेकर कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया।

राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य डॉ. जी.एस. तितियाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज लगातार नई और उन्नत तकनीकों को चिकित्सा शिक्षा और मरीजों के उपचार में शामिल करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक कार्यक्रम भविष्य के चिकित्सकों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तैयार करने में बेहद उपयोगी साबित होते हैं।

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चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी ने कहा कि कुमाऊं क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीकों का उपयोग मरीजों को तेज, सटीक और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों से अपडेट रखने में मदद करती हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. परमजीत सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. सुधीर वर्मा, डॉ. ऋतु रखोलिया, डॉ. रवि, डॉ. गौरी सहित मेडिसिन विभाग के कई चिकित्सक, पीजी छात्र-छात्राएं और मेडिकल स्टाफ मौजूद रहे।

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