हल्द्वानी। फोन टैपिंग के आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचाने वाले कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने की अपनी चेतावनी वापस ले ली है। वीडियो संदेश जारी कर विधायक ने कहा कि उस समय वह भावनात्मक स्थिति में थे और उन्हें ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मकसद लोकप्रियता हासिल करना नहीं था, बल्कि वह अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
परिवार की आपत्ति के बाद बदला फैसला
दरअसल, बीते बुधवार को प्रेस वार्ता के दौरान विधायक सुमित हृदयेश ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने दावा किया था कि उनके परिवार के सदस्यों के फोन टैप किए जा रहे हैं और एक कथित गिरोह नेताओं की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। विधायक ने मामले में न्याय नहीं मिलने पर गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी।
इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गईं। गुरुवार को सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में सुमित हृदयेश ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उन्हें वरिष्ठजनों, मातृशक्ति, भाई-बहनों और समर्थकों का भरपूर स्नेह व समर्थन मिला। उन्होंने सभी का आभार जताते हुए कहा कि परिवार के सदस्यों ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई और समझाया कि उन्हें इस तरह के शब्द नहीं कहने चाहिए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी आत्मदाह संबंधी घोषणा वापस लेने का निर्णय लिया।
न्याय मिलने की उम्मीद, व्यवस्था पर जताया भरोसा
विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि वह अपने मुद्दे को लेकर अब भी न्याय की उम्मीद रखते हैं। उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। इसके साथ ही उन्होंने गोल्ज्यू देवता और कोटगाड़ी देवी मैया के न्याय पर भी भरोसा जताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

