रिफंड से लेकर लोन-वीजा तक मिलेगा लाभ, आयकर विभाग के रिकॉर्ड में बनी रहेगी साफ वित्तीय प्रोफाइल
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 में ऐसे कई करदाता हैं, जिनकी आय टैक्स के दायरे से नीचे रह सकती है। Section 87A के तहत मिलने वाली छूट, विभिन्न कटौतियों या पार्ट-टाइम काम, फ्रीलांसिंग और डिविडेंड जैसी सीमित आय के कारण उनकी टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।
ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि जब टैक्स देना ही नहीं है तो क्या इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरना जरूरी है? विशेषज्ञों का कहना है कि जवाब ‘हां’ है—क्योंकि ‘निल आईटीआर’ फाइल करना कई मामलों में बेहद फायदेमंद साबित होता है।
दरअसल, आईटीआर सिर्फ टैक्स भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि आपकी सालाना आय का एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जो Income Tax Department के रिकॉर्ड में दर्ज रहता है। भले ही आपकी टैक्स देनदारी शून्य हो, लेकिन आईटीआर फाइल करने से आपकी वित्तीय प्रोफाइल साफ और व्यवस्थित रहती है।
आज के डिजिटल युग में आयकर विभाग Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) जैसे टूल्स के जरिए बैंकिंग, निवेश, ब्याज, टीडीएस और बड़े लेनदेन पर नजर रखता है। ऐसे में आईटीआर दाखिल करने से आपका डेटा आधिकारिक रूप से अपडेट रहता है और भविष्य में किसी नोटिस या जांच की आशंका कम हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही आपकी आय पर टैक्स नहीं बनता हो, लेकिन बैंक ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट, फ्रीलांसिंग या शेयरों से मिलने वाले डिविडेंड पर टीडीएस कट सकता है। ऐसे मामलों में आईटीआर फाइल करना जरूरी हो जाता है, क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे आप कटा हुआ टैक्स रिफंड के रूप में वापस पा सकते हैं।
इसके अलावा, बैंक और वित्तीय संस्थान लोन या क्रेडिट कार्ड जारी करते समय आईटीआर को आय के प्रमाण के रूप में मांगते हैं। नियमित रूप से आईटीआर भरने से आपकी वित्तीय विश्वसनीयता बढ़ती है और भविष्य में ऋण मिलने की संभावना मजबूत होती है।
विदेश यात्रा, पढ़ाई या वीजा आवेदन के दौरान भी पिछले 3 से 5 वर्षों के आईटीआर रिकॉर्ड मांगे जाते हैं। इससे आपकी आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है, इसलिए ‘निल आईटीआर’ फाइल करना भविष्य की योजनाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यदि किसी वित्त वर्ष में आपको शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या व्यवसाय में नुकसान हुआ है, तो आईटीआर दाखिल कर उस नुकसान को अगले वर्षों में एडजस्ट किया जा सकता है, जिससे आगे चलकर टैक्स बचत का लाभ मिलता है।
लगातार ‘निल आईटीआर’ फाइल करने से आपका टैक्स रिकॉर्ड मजबूत और पारदर्शी बनता है। इससे न सिर्फ वित्तीय अनुशासन बना रहता है, बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की जांच या नोटिस की संभावना भी कम हो जाती है।
