पश्चिम एशिया में अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन: तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर पहुंचा, होर्मुज पर दबाव बढ़ा

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दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया में सैन्य हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी नौसेना का अत्याधुनिक विमानवाहक पोत USS George H.W. Bush अब इस क्षेत्र में पहुंच गया है। इसके साथ ही इलाके में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोतों की संख्या तीन हो गई है, जिससे सैन्य दबाव और रणनीतिक गतिविधियां दोनों बढ़ गई हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कैरियर 23 अप्रैल को हिंद महासागर में अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में सक्रिय हुआ। जारी तस्वीरों में इसके डेक पर बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान तैनात दिखाई दिए, जो किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयारियों का संकेत हैं।

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यह पोत निमित्ज़ क्लास का परमाणु-संचालित युद्धपोत है, जिसे समुद्र में “चलता-फिरता एयरबेस” माना जाता है। करीब 1,04,000 मीट्रिक टन वजनी इस कैरियर पर 90 तक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। 5000 से अधिक सैन्यकर्मी इसके संचालन में लगे रहते हैं, जबकि इसकी न्यूक्लियर क्षमता इसे लंबे समय तक बिना ईंधन के ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता, तब तक अमेरिका Strait of Hormuz पर अपना दबदबा बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि यह अहम समुद्री रास्ता अब रणनीतिक दबाव का हिस्सा है और इसे बंद रखकर ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर डाला जा रहा है।

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होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है, जहां से खाड़ी देशों का बड़ा तेल निर्यात वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर तेल और गैस उत्पादन के कारण फिलहाल बाजार स्थिर है।

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कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि भले ही सीधा टकराव टला हुआ हो, लेकिन दबाव की राजनीति और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अभी जारी रहेगी। स्थिति फिलहाल “तनावपूर्ण शांति” की बनी हुई है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है।

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