Uttarakhand: देशभर में साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा, देहरादून के तीन आरोपी नामजद

खबर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम पुलिस ने देशभर में सक्रिय साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए देहरादून के तीन युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि ये आरोपी साइबर अपराधियों द्वारा ठगी गई रकम को बैंक खातों के जरिए छिपाने, ट्रांसफर करने और वास्तविक अपराधियों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे।

साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तैनात निरीक्षक सुधीर कुमार की तहरीर पर दर्ज प्राथमिकी के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों में निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड, टास्क फ्रॉड और पार्ट टाइम जॉब फ्रॉड जैसे मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है। ठगी की इस रकम को छिपाने और उसकी पहचान मिटाने के लिए अपराधी तथाकथित “म्यूल अकाउंट्स” का इस्तेमाल करते हैं।

यह भी पढ़ें 👉  “टाइगर अभी जिंदा है”, हवा बदली तो भाजपा की लुटिया डुबो दूंगा: हरीश रावत

जांच के दौरान एनसीआरपी पोर्टल, सीएफसीएफआरएमएस, आई4सी डेटा, बैंक रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेजों और मनी ट्रेल विश्लेषण के आधार पर एक संदिग्ध बैंक खाते की पहचान की गई। पुलिस के अनुसार इंडियन ओवरसीज बैंक के एक खाते में साइबर अपराध से जुड़ी करीब 7.10 लाख रुपये की राशि जमा हुई थी। रकम खाते में आते ही उसे विभिन्न अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद एटीएम, चेक, पीओएस मशीन और यूपीआई के जरिए निकासी कर धन के स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड ने खोया अपना सितारा: दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का निधन

जांच में सामने आया कि खाताधारक राकेश रोशन ने कथित तौर पर कमीशन और आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधाएं साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराई थीं। पुलिस का आरोप है कि इन संसाधनों का उपयोग ठगी की रकम को एकत्रित करने, उसकी लेयरिंग करने और आगे वितरित करने के लिए किया गया। मामले में राकेश रोशन के साथ कृष अरोड़ा और अनुराग को भी आरोपी बनाया गया है। तीनों देहरादून निवासी बताए गए हैं।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तीनों आरोपियों की भूमिका एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में सामने आई है। ये विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर वास्तविक ठगों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: गढ़वाल विवि की पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तिथि में बदलाव, अब 24 मई को होगी परीक्षा

जांच में फर्जी केवाईसी दस्तावेजों, फर्जी फर्मों, अलग-अलग मोबाइल नंबरों, ई-मेल आईडी और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स के इस्तेमाल के संकेत भी मिले हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और साइबर ठगी के पूरे तंत्र का खुलासा करने में जुटी है।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page