सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बर्थराइट सिटिजनशिप पर कार्यकारी आदेश संविधान के खिलाफ, 6-3 के बहुमत से फैसला
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा। देश की सर्वोच्च अदालत ने जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) देने की व्यवस्था में बदलाव करने संबंधी ट्रंप प्रशासन के कार्यकारी आदेश पर रोक बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि यह अमेरिकी संविधान के अनुरूप नहीं है। अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि 20 जनवरी 2025 को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले दिन जारी किया गया यह आदेश संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
सुप्रीम कोर्ट के बहुमत वाले फैसले में कहा गया कि ट्रंप का आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) की मूल भावना के विपरीत है। इस संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोगों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होती है। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान में निहित इस अधिकार को सीमित नहीं कर सकते।
हालांकि, न्यायमूर्ति ब्रेट कैवनॉ ने अलग राय रखते हुए कहा कि यह आदेश संघीय कानून के अनुरूप नहीं है, लेकिन इसे सीधे संविधान का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद बहुमत का फैसला ट्रंप प्रशासन के खिलाफ गया।
लगातार तीसरा बड़ा झटका
हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को यह तीसरा बड़ा झटका मिला है। इससे पहले फरवरी में अदालत ने उनकी टैरिफ नीति को निरस्त कर दिया था। वहीं सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को फेडरल रिजर्व की अधिकारी लीसा कुक को तत्काल पद से हटाने से भी रोक दिया था। लगातार तीन अहम मामलों में अदालत के फैसले ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक और कानूनी चुनौती माने जा रहे हैं।
क्या था ट्रंप का आदेश?
ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की नई व्याख्या की जानी चाहिए। उनके कार्यकारी आदेश के अनुसार केवल उन्हीं बच्चों को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता मिलनी चाहिए, जिनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) हो।
इस प्रस्ताव के तहत अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे लोगों या अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता देने का प्रावधान समाप्त करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, इस आदेश पर निचली अदालतों ने पहले ही रोक लगा दी थी और यह कभी लागू नहीं हो पाया।
14वें संशोधन की ऐतिहासिक अहमियत
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन गृहयुद्ध के बाद लागू किया गया था। इसका उद्देश्य पहले गुलाम रहे अश्वेत नागरिकों को समान संवैधानिक अधिकार और नागरिकता प्रदान करना था। पिछले एक शताब्दी से अधिक समय से इसकी व्याख्या यही रही है कि विदेशी राजनयिकों के बच्चों जैसे कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर व्यक्ति जन्म से अमेरिकी नागरिक माना जाएगा।
रूढ़िवादी बहुमत के बावजूद ट्रंप के खिलाफ फैसला
दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों में से छह को आमतौर पर रूढ़िवादी विचारधारा का माना जाता है, जिनमें ट्रंप द्वारा नियुक्त तीन न्यायाधीश भी शामिल हैं। इसके बावजूद अदालत ने इस मामले में ट्रंप प्रशासन के पक्ष को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई अन्य फैसलों में ट्रंप के पक्ष में भी निर्णय दिए हैं।

