खाड़ी देशों की कूटनीति से टला ईरान पर अमेरिकी हमला, युद्ध के मुहाने से लौटा पश्चिम एशिया

खबर शेयर करें

वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के मुहाने से लौट आया है। सऊदी अरब, कतर और ओमान की तेज, गोपनीय और उच्चस्तरीय कूटनीतिक पहल के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया है। खाड़ी देशों के हस्तक्षेप ने अमेरिका और ईरान के बीच तेजी से बढ़ते तनाव को थाम लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनने से बच गए।

A Sleepless Night to Defuse the War Bomb: खाड़ी देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन को मनाना आसान नहीं था। सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी को बताया कि ईरान पर हमले के संभावित आदेश को रोकने के लिए “आखिरी क्षण तक कड़ा संघर्ष” करना पड़ा। अधिकारियों ने इस पूरी कूटनीतिक कवायद को “बम को डिफ्यूज करने वाली एक अनिद्रा भरी रात” करार दिया। उनका कहना है कि यदि हमला होता, तो उसके Grave Blowbacks यानी गंभीर और दूरगामी दुष्परिणाम पूरे पश्चिम एशिया को झकझोर सकते थे।

यह भी पढ़ें 👉  नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव तय! चुनावी व्यवस्था से लेकर नेताओं के कार्यकाल तक होगा बड़ा फेरबदल

अमेरिका की चेतावनी से बढ़ा तनाव

दरअसल, अमेरिका ने ईरान में प्रदर्शनकारियों पर कथित दमन को लेकर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और धमकियों का दौर तेज हो गया और युद्ध की आशंका गहराने लगी। हालात इतने संवेदनशील हो गए कि खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने सीधे ईरानी निशाने पर आ सकते थे।

तेहरान को भी दी गई कड़ी चेतावनी

खाड़ी देशों ने सिर्फ वॉशिंगटन पर ही नहीं, बल्कि तेहरान पर भी दबाव बनाया। सऊदी अरब, कतर और ओमान ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि उसने खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ठिकानों या जहाजों पर हमला किया, तो क्षेत्रीय देशों के साथ उसके संबंध हमेशा के लिए टूट सकते हैं। इस दोतरफा दबाव ने हालात को संभालने में निर्णायक भूमिका निभाई।

यह भी पढ़ें 👉  अमेरिका में एंट्री अब आसान नहीं...ट्रंप सरकार ने सख्त किए नियम, बच्चों और बुजुर्गों की भी होगी बायोमेट्रिक जांच

कतर के अल-उदेद एयरबेस पर हाई अलर्ट

तनाव अपने चरम पर पहुंचते ही कतर स्थित मध्य-पूर्व के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे अल-उदेद एयरबेस पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका को देखते हुए सिक्योरिटी लेवल बढ़ाया गया, कुछ कर्मियों को अस्थायी रूप से हटाया गया और सैन्य गतिविधियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी गई।

कूटनीति सफल, हालात हुए सामान्य

कूटनीतिक बातचीत सफल होने के बाद बुधवार शाम से ही हालात में सुधार आने लगा। राजनयिक सूत्रों के अनुसार अब सैन्य विमान और कर्मी दोबारा अपनी पूर्व तैनाती पर लौट रहे हैं और सुरक्षा अलर्ट के स्तर को घटाया जा रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि तत्काल सैन्य टकराव का खतरा फिलहाल टल गया है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: बोलेरो 250 मीटर गहरी खाई में गिरी, चालक की मौत, दो घायल

ट्रंप के बदले तेवर, मिला भरोसा

लगातार बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में अचानक नरमी आई। उन्होंने कहा कि उन्हें “दूसरी तरफ के बेहद अहम सूत्रों” से यह भरोसा मिला है कि ईरान प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा नहीं देगा। इसी आश्वासन और खाड़ी देशों के दबाव के बाद अमेरिका ने सैन्य विकल्प को अस्थायी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया।

संवाद जारी रखने पर जोर

हालांकि सऊदी अधिकारियों का कहना है कि संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भरोसा बहाल रखने और भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनें, इसके लिए लगातार संवाद और सक्रिय कूटनीति जरूरी है। फिलहाल खाड़ी देशों की इस पहल ने पश्चिम एशिया को एक बड़े युद्ध से बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

ADVERTISEMENTS Ad

You cannot copy content of this page