उत्तरकाशी आपदा: राहत-बचाव कार्य फिर शुरू, गंगोत्री हाईवे के पास सड़क धंसी, राहत टीमें भटवाड़ी में फंसी

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उत्तरकाशी। धराली और हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने से आई भीषण आपदा के बाद बुधवार सुबह से एक बार फिर राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की टीमें मोर्चा संभाले हुए हैं। आपदा कंट्रोल रूम से हालात पर पल-पल नजर रखी जा रही है।

मंगलवार दोपहर धराली गांव के ऊपर खीरगंगा में बादल फटने से नदी में अचानक भीषण सैलाब आया। तेज बहाव और मलबे की चपेट में आकर धराली का मुख्य बाजार पूरी तरह तबाह हो गया। इस आपदा में क्षेत्र का प्राचीन कल्पकेदार मंदिर भी मलबे में समा गया। प्रशासन ने अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि करीब 70 लोग अब भी लापता हैं।

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डीएम-एसपी मौके पर रवाना, राहत शिविर स्थापित
घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और पुलिस अधीक्षक सरिता डोबाल मौके के लिए रवाना हो गए। प्रशासन ने हर्षिल में राहत शिविर स्थापित किए हैं। डीएम ने बताया कि नुकसान का वास्तविक आकलन मौके पर पहुंचकर ही किया जा सकेगा।

हाईवे बंद, संपर्क टूटा, राहत टीमें भटवाड़ी में फंसी
लगातार हो रही मूसलधार बारिश से जनपद में नदी-नालों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। गंगोत्री हाईवे पर पापड़गाड़ के पास करीब 30 मीटर सड़क धंसने से धराली और हर्षिल का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। राहत सामग्री और बचाव दल लेकर जा रही टीमें भटवाड़ी में फंसी हुई हैं।

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रातों-रात लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने देर रात ही हर्षिल और आस-पास के क्षेत्रों से मुखबा और कछोरा जैसे सुरक्षित स्थानों पर लोगों को शिफ्ट कराया। नेताला से लेकर भटवाड़ी तक कई जगहों पर सड़कें धंसी हुई हैं। मनेरी और ओंगी के बीच भी नदी के कटाव से खतरा बना हुआ है।

केदारनाथ जैसी आपदा की पुनरावृत्ति!
आईआईटी रुड़की के हाइड्रोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक प्रो. अंकित अग्रवाल ने उत्तरकाशी की इस आपदा को 2013 की केदारनाथ त्रासदी से मिलता-जुलता बताया है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ और मानसून के टकराव से यह भीषण स्थिति बनी। जलवायु परिवर्तन के चलते हिमालयी क्षेत्र में ऐसे खतरे अब और अधिक बार देखने को मिल सकते हैं। प्रोफेसर अग्रवाल जर्मनी की पॉट्सडैम यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर इंडो-जर्मन परियोजना के तहत इस दिशा में शोध कर रहे हैं।

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निगरानी जारी, चुनौती बड़ी
हालात गंभीर हैं और मौसम की मार राहत कार्यों को और मुश्किल बना रही है। जिला प्रशासन, सेना और आपदा प्रबंधन टीमें फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं। फिलहाल, मलबे में दबे लोगों की तलाश और संपर्क बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती है।

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