Uttarakhand: कुंभ से चुनाव तक उत्तराखंड में सुरक्षा का खाका तैयार, 24 घंटे सोशल मीडिया पर नजर

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देहरादून। आगामी कुंभ मेला, विधानसभा चुनाव और लगातार बढ़ रहे पर्यटक एवं श्रद्धालुओं के दबाव को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस मुख्यालय में डीजीपी दीपम सेठ की अध्यक्षता में हुई इंटेलीजेंस अधिकारियों की बैठक में प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा से लेकर वीआईपी सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया गया। बैठक में अधिकारियों को संवेदनशील आयोजनों के दौरान किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पहले से ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

कुंभ और धार्मिक आयोजनों के लिए बनेगी विशेष सुरक्षा रणनीति

आगामी कुंभ मेला प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी से तैयारियां शुरू करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही प्रदेश में होने वाले अन्य प्रमुख धार्मिक एवं सरकारी आयोजनों के लिए भी अलग-अलग सुरक्षा जरूरतों का आकलन कर कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

वर्तमान में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से यात्रा मार्गों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों का समय रहते आकलन करने को कहा गया।

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सोशल मीडिया पर 24 घंटे निगरानी, फर्जी खबरों पर फैक्ट चेक

बैठक में सोशल मीडिया को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक खबरें और आपत्तिजनक पोस्ट संवेदनशील मुद्दा हैं। कुंभ और विधानसभा चुनाव जैसे बड़े आयोजनों के दौरान इनका प्रभाव और अधिक हो सकता है।

इसी को देखते हुए इंटेलीजेंस को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। भ्रामक या गलत सूचनाओं के सामने आने पर उनकी वास्तविकता जांचने के लिए प्रभावी फैक्ट चेक व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य गलत सूचनाओं को लेकर पैदा होने वाली भ्रम की स्थिति को समय रहते दूर करना और कानून-व्यवस्था से जुड़ी किसी भी चुनौती पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एजेंसियां रहेंगी समन्वय में

प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे जिलों की सुरक्षा भी बैठक के प्रमुख एजेंडों में रही। सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों, सीमा पार से घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी तत्वों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने को लेकर अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

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इस संबंध में आईटीबीपी, एसएसबी, सेना, आईबी, राज्य पुलिस और एटीएस के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए उच्चस्तरीय इंटर एजेंसी को-ऑर्डिनेशन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान हो सके और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए संयुक्त रणनीति बनाई जा सके।

विधानसभा चुनाव में वीआईपी सुरक्षा की चुनौती

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत अन्य वीआईपी की सुरक्षा को लेकर भी विशेष तैयारियां करने के निर्देश दिए गए। चुनावी गतिविधियां बढ़ने के साथ मुख्यमंत्री के प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दौरे और चुनावी सभाएं बढ़ेंगी। इसके अलावा अन्य बड़े नेताओं और मंत्रियों के कार्यक्रम भी अलग-अलग स्थानों पर प्रस्तावित होंगे।

ऐसे में वीआईपी के भ्रमण, जनसभाओं और अन्य चुनावी कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा गया। अधिकारियों को कार्यक्रमों की संवेदनशीलता के आधार पर पहले से सुरक्षा आकलन करने और आवश्यक इंतजाम पूरे करने के निर्देश दिए गए।

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जनशक्ति और तकनीकी संसाधनों का होगा समय से इंतजाम

बड़े आयोजनों और चुनावी गतिविधियों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिस बल, तकनीकी उपकरण और अन्य संसाधनों का समय रहते प्रबंधन करने को कहा गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि महत्वपूर्ण आयोजनों के दौरान संसाधनों की कमी के कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

इसके साथ ही आगामी राज्य स्थापना दिवस, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्वों को देखते हुए संवेदनशील स्थानों और क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों से स्थानीय स्तर पर संभावित संवेदनशीलता का आकलन कर उसके अनुरूप सुरक्षा प्रबंध करने को कहा गया।

चुनाव और कुंभ के साथ बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर नजर

बैठक में इस बात पर जोर रहा कि आगामी महीनों में प्रदेश में एक के बाद एक बड़े धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आयोजन होने हैं। चारधाम यात्रा, प्रमुख धार्मिक आयोजन, कुंभ मेला और विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होगी। ऐसे में इंटेलीजेंस इनपुट, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत रखना सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा।

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