Uttarakhand: परीक्षा व्यवस्था पर सरकार की बड़ी सख्ती…पेपर लीक या गड़बड़ी हुई तो कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक होंगे जिम्मेदार

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों की परीक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब विश्वविद्यालयों में आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं के संचालन, गोपनीयता और पारदर्शिता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। यदि भविष्य में किसी भी परीक्षा में पेपर लीक, अनियमितता या गोपनीयता भंग होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो संबंधित कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ नकल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह महत्वपूर्ण निर्देश प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विधानसभा स्थित सभाकक्ष में तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में विभागीय योजनाओं, भर्ती, निर्माण कार्यों और तकनीकी संस्थानों में शैक्षणिक व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई।

विश्वविद्यालयों को विकसित करना होगा मजबूत परीक्षा तंत्र

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए परीक्षा प्रणाली का निष्पक्ष और विश्वसनीय होना सबसे अधिक आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि ऐसा मजबूत और आधुनिक परीक्षा प्रबंधन तंत्र विकसित किया जाए, जिससे प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित एवं पारदर्शी बनी रहे।

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उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में परीक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीर अपराध माना जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

480 गेस्ट फैकल्टी भर्ती में देरी पर जताई नाराजगी

बैठक के दौरान मंत्री ने राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में 480 गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति का प्रस्ताव करीब एक माह से शासन स्तर पर लंबित रहने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया में तत्काल तेजी लाई जाए ताकि नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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तकनीकी संस्थानों में लागू होगा शैक्षणिक कैलेंडर

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक कैलेंडर अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पठन-पाठन, प्रयोगात्मक कार्य, परीक्षाएं और परिणाम घोषित होने से शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी।

इसके साथ ही प्रत्येक संस्थान में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) कैलेंडर लागू करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि शिक्षकों को समय-समय पर देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में प्रशिक्षण मिल सके और वे नई तकनीकों एवं आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से अपडेट रहें।

रिक्त पद जल्द भरने के निर्देश

मंत्री ने तकनीकी संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षकों और कर्मचारियों की उपलब्धता बेहद जरूरी है।

निर्माण कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं

समीक्षा बैठक में राजकीय पॉलिटेक्निक और विभिन्न प्रौद्योगिकी संस्थानों में चल रहे निर्माण कार्यों की भी संस्थानवार समीक्षा की गई। डॉ. रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।

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उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी परियोजना में अनावश्यक देरी हुई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधूरे भवनों और लंबित परियोजनाओं का सबसे अधिक नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है, इसलिए निर्माण कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।

कई संस्थानों के निदेशकों ने प्रस्तुत की प्रगति रिपोर्ट

बैठक में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, गोपेश्वर, उत्तरकाशी, टिहरी, पंतनगर, टनकपुर, पिथौरागढ़, पौड़ी और अल्मोड़ा सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के निदेशकों ने अपने-अपने संस्थानों में चल रहे निर्माण कार्यों और शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

बैठक में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर, अपर सचिव तकनीकी शिक्षा मनुज गोयल, निदेशक तकनीकी शिक्षा देशराज, विभिन्न राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के निदेशक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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