हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में चल रहे कथित टैक्स चोरी के संगठित खेल ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा और हल्द्वानी जैसे प्रमुख औद्योगिक व व्यापारिक केंद्रों में यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय बताया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी बड़े खिलाड़ी पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कोई सामान्य गड़बड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित ‘ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट’ है, जिसमें कथित तौर पर बड़े कारोबारी और कुछ विभागीय अधिकारी शामिल हैं। आरोप है कि ‘सेटिंग’ के जरिए टैक्स चोरी को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार तंत्र या तो चुप है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि इस पूरे खेल के पीछे एक मजबूत ‘लाइजनिंग चेन’ काम कर रही है, जो स्थानीय स्तर से लेकर बाहरी राज्यों तक फैली हुई है। दिल्ली, गाजियाबाद, बरेली और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से जुड़े बड़े कारोबारी भी इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं। इस गठजोड़ के चलते न केवल नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
कथित तौर पर विभाग के कुछ अधिकारी इस नेटवर्क के प्रभाव में काम कर रहे हैं। उन पर आरोप है कि वे बड़े माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई से बचते हैं, जबकि छोटी मछलियों को पकड़कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दिखावा करते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यह खेल बिना किसी डर के चलता आ रहा है।
मामले की जानकारी उच्च स्तर तक पहुंचने के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव कई तरह के सवाल खड़े करता है—क्या सिस्टम पर दबाव है? क्या अंदरखाने मिलीभगत इतनी मजबूत है कि कार्रवाई संभव नहीं? या फिर जानबूझकर इस पूरे खेल को नजरअंदाज किया जा रहा है?
जिस तरह से लगातार इस नेटवर्क की चर्चा सामने आ रही है, उससे यह मामला जल्द ही बड़ा रूप ले सकता है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर ‘सेटिंग’ का यह खेल यूं ही चलता रहेगा, और ईमानदार कारोबारियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

