देहरादून। उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे प्रदेशभर में सायरन बजेंगे। इस दौरान मोबाइल पर भूदेव एप के माध्यम से भी चेतावनी संदेश के साथ कंपन और बीप की आवाज सुनाई देगी। हालांकि, यह किसी वास्तविक भूकंप का संकेत नहीं है, बल्कि पूर्व निर्धारित परीक्षण का हिस्सा है। प्रशासन ने लोगों से सायरन बजने पर घबराने और किसी तरह की अफवाह पर ध्यान देने से बचने की अपील की है।
गुरुवार को भूदेव एप के माध्यम से भी लोगों को इस परीक्षण की जानकारी दी गई। आपदा प्रबंधन विभाग का उद्देश्य आमजन को भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली से परिचित कराने के साथ ही सेंसर और सायरन की कार्यक्षमता की जांच करना है, ताकि वास्तविक आपदा के समय चेतावनी समय पर लोगों तक पहुंच सके।
प्रदेश में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि परीक्षण के दौरान सायरन की आवाज से लोगों को परिचित कराया जाएगा। इससे वास्तविक भूकंप के समय चेतावनी मिलने पर लोग उसे पहचान सकेंगे और घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाने सहित आवश्यक सावधानियां बरत सकेंगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। परीक्षण के दौरान यदि किसी उपकरण या तकनीकी व्यवस्था में खामी सामने आती है, तो उसे तत्काल दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
दोगुने किए जाएंगे सेंसर और सायरन
भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश में सेंसर और सायरन की संख्या दोगुनी करने की तैयारी है। इन्हें करीब पांच से दस किलोमीटर के अंतराल पर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और आईआईटी रुड़की के सहयोग से अतिरिक्त सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी प्रक्रिया में है।
भूदेव एप अपडेट रखने की अपील
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से भूदेव एप का अपडेटेड वर्जन रखने और एप को स्थान की अनुमति देने की अपील की है। परीक्षण के दौरान मोबाइल पर अलर्ट संदेश, कंपन और बीप की आवाज आ सकती है। ऐसे में लोगों को इसे निर्धारित अभ्यास का हिस्सा समझने और किसी तरह की अफवाह फैलाने से बचने की सलाह दी गई है।

