Uttarakhand: हरदा की ‘दौड़’ पर कांग्रेस ने लगाया ब्रेक, सैलजा की चिट्ठी से बढ़ी सियासी हलचल

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हल्द्वानी। उत्तराखंड की सियासत में ‘हरदा’ की वापसी जितनी तेजी से हुई, उतनी ही तेजी से कांग्रेस के भीतर हलचल भी बढ़ती दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य लाभ के बाद हरीश रावत ने जैसे ही राजनीतिक मैदान में कदम रखा, रोड शो से लेकर लगातार कार्यक्रमों तक उनकी सक्रियता नजर आने लगी। समर्थकों की भीड़ जुटी तो सियासी चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया। लेकिन अब पार्टी संगठन की ओर से आई एक चिट्ठी ने इस पूरी कवायद को नया मोड़ दे दिया है।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने एक अक्तूबर को हरीश रावत को पत्र लिखकर पार्टी प्रोटोकॉल की याद दिलाई है। सैलजा ने सवाल उठाया है कि रावत जो यात्राएं और राजनीतिक कार्यक्रम कर रहे हैं, उनकी जानकारी न तो प्रदेश अध्यक्ष को है और न ही प्रदेश प्रभारी को। ऐसे में पत्र को महज औपचारिकता मानना मुश्किल है। सियासी गलियारों में इसे हरदा की बढ़ती गतिविधियों पर संगठन की ‘ब्रेक लगाने की कोशिश’ के तौर पर देखा जा रहा है।

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तीन महीने के ब्रेक के बाद हरदा फिर ‘फुल फॉर्म’ में

कुछ समय पहले स्वास्थ्य कारणों से हरीश रावत ने राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाई थी। करीब तीन माह तक दिल्ली और अन्य स्थानों पर स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद जब वह वापस लौटे तो उनकी सक्रियता ने सबका ध्यान खींच लिया।

हरिद्वार से रोड शो हुआ। समर्थक जुटे और माहौल ऐसा बना कि संदेश साफ था—हरदा अभी राजनीतिक पिच से बाहर नहीं हुए हैं।

हरिद्वार के बाद रावत ने एक के बाद एक कई कार्यक्रमों में भाग लिया। अब उनका रुख कुमाऊं की ओर है। अल्मोड़ा समेत कई स्थानों पर उनके कार्यक्रम प्रस्तावित बताए जा रहे हैं।

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समर्थकों की भीड़ ने बढ़ाया उत्साह, संगठन की बेचैनी भी बढ़ी?

रावत खांटी कांग्रेसी माने जाते हैं और हरिद्वार से सांसद भी रह चुके हैं। लिहाजा वहां उनका अपना मजबूत समर्थक वर्ग है। रोड शो में जुटी भीड़ ने उनकी सक्रियता को राजनीतिक ताकत का संकेत दिया तो पार्टी के भीतर इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कुछ नेता रावत की इस लगातार सक्रियता को लेकर असहज थे। चर्चा यहां तक थी कि उनकी गतिविधियों को लेकर पार्टी हाईकमान तक अपनी बात पहुंचाई जा रही थी।

अब सैलजा की चिट्ठी सामने आने के बाद पर्दे के पीछे चल रही इस सियासी कहानी को जैसे शब्द मिल गए हैं।

सैलजा की चिट्ठी में क्या है?

एक अक्तूबर को लिखे पत्र में प्रदेश प्रभारी ने रावत को बताया कि पार्टी के संज्ञान में आया है कि वह यात्राएं और कार्यक्रम कर रहे हैं, लेकिन इनकी जानकारी संगठन को नहीं है।

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सैलजा ने अनुरोध किया है कि ऐसे कार्यक्रमों को लेकर प्रदेश संगठन और प्रभारी को जानकारी दी जाए। पत्र का लहजा भले ही संगठनात्मक हो, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ नजर आ रहा है—हरदा अपनी राजनीतिक पारी खेलें, लेकिन संगठन की जानकारी और समन्वय के साथ।

अब नजर कुमाऊं दौरे पर

हरीश रावत की सक्रियता पर संगठन की चिट्ठी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे क्या होगा? क्या हरदा अपने प्रस्तावित कार्यक्रम जारी रखेंगे या संगठन के संदेश के बाद उनकी ‘राजनीतिक रफ्तार’ कुछ धीमी होगी?

फिलहाल नजर उनके कुमाऊं दौरे पर है। अल्मोड़ा और अन्य स्थानों पर प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर कांग्रेस के भीतर भी उत्सुकता है और बाहर भी। क्योंकि उत्तराखंड की राजनीति में हरदा जब मैदान में उतरते हैं तो सिर्फ कार्यक्रम नहीं होते सियासी संकेत भी निकलते हैं।

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