Uttarakhand: बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी मामले में बड़ी कार्रवाई…बीकेटीसी ने खजांची हटाया, कई कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज

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देहरादून/बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में जांच तेज होने के साथ ही कार्रवाई का दौर भी शुरू हो गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए दान गणना के खजांची संदेश मेहता को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह पूजा कार्यालय में तैनात केदार सिंह रावत को नया खजांची नियुक्त किया गया है। वहीं, मामले में लापरवाही और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

सूत्रों के अनुसार, बीकेटीसी जल्द ही इस प्रकरण से जुड़े कई कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि चढ़ावा हेराफेरी मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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तीन स्तर पर चल रही है जांच

बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों की त्रिस्तरीय जांच जारी है। एक ओर बीकेटीसी की चार सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुकी है, वहीं पुलिस अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही है। इसके अलावा शासन की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति भी पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल में जुटी है।

मंगलवार को गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित समिति बदरीनाथ मंदिर पहुंची। समिति ने दान गणना की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया और गणना कक्ष की व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया। जांच के दौरान समिति ने गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली, ताकि चढ़ावे की गणना के दौरान हुई गतिविधियों और संभावित अनियमितताओं की सटीक जानकारी जुटाई जा सके।

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रजिस्टर में मिलीं गंभीर कमियां

बीकेटीसी की प्रारंभिक जांच में दान गणना से जुड़े रजिस्टरों में कई कमियां सामने आईं। इन्हीं अनियमितताओं के आधार पर खजांची संदेश मेहता को उनके पद से हटाकर पूजा कार्यालय में तैनात कर दिया गया। उनकी जगह केदार सिंह रावत को दान गणना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने खजांची को हटाने की पुष्टि करते हुए कहा कि दान गणना रजिस्टर में पाई गई कमियों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

चढ़ावा हेराफेरी के मामले ने प्रदेशभर में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें शासन, पुलिस और बीकेटीसी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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