तीन साल बाद भरी गई अध्यक्ष की कुर्सी, डॉ. हेमचंद्र पांडे बने सदस्य, लंबित भर्तियों को मिलेगी रफ्तार
देहरादून। करीब तीन वर्षों के लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) को स्थायी अध्यक्ष मिल गया है। प्रदेश सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गजेंद्र जोशी को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही डॉ. हेमचंद्र पांडे को आयोग का सदस्य बनाया गया है। मंगलवार को शासन की ओर से दोनों नियुक्तियों के आदेश जारी कर दिए गए।
आयोग में जून 2023 से अध्यक्ष का पद खाली था। इस दौरान आयोग कार्यवाहक अध्यक्ष के भरोसे संचालित हो रहा था, जिससे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और भर्ती संबंधी फैसलों पर असर पड़ रहा था। नई नियुक्तियों के बाद अब राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
तीन साल से खाली थी अध्यक्ष की कुर्सी
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग राज्य की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती एजेंसियों में से एक है, जिसके जिम्मे विभिन्न विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सीधी भर्ती कराना होता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद लगातार खाली होते गए, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। कई महत्वपूर्ण मामलों में आयोग अपेक्षित गति से निर्णय नहीं ले पा रहा था।
38 वर्षों तक सेना में दी सेवाएं
नवनियुक्त अध्यक्ष ले. जनरल (सेनि.) गजेंद्र जोशी मूल रूप से चंपावत जिले के लटोली गांव के निवासी हैं। उन्होंने भारतीय सेना में 38 वर्षों से अधिक की गौरवपूर्ण सेवा दी है और 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए।
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित स्ट्राइक-1 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) और महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल के कमांडेंट के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ऑपरेशन पवन (श्रीलंका), ऑपरेशन रक्षक (जम्मू-कश्मीर) तथा पूर्वोत्तर भारत में कई आतंकवाद विरोधी अभियानों का सफल नेतृत्व किया।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम), अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) और सेना मेडल (एसएम) जैसे देश के प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरणों से सम्मानित किया जा चुका है।
2023 से कार्यवाहक अध्यक्ष के भरोसे चल रहा था आयोग
गौरतलब है कि 11 जून 2023 को तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार के इस्तीफे के बाद आयोग में स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। इस दौरान वरिष्ठ सदस्य डॉ. जगमोहन सिंह राणा, उसके बाद रविदत्त गोदियाल और हाल में अनिल कुमार राणा कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
भर्ती प्रक्रियाओं में आएगी तेजी
सरकार के इस फैसले को राज्य के हजारों प्रतियोगी अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। स्थायी अध्यक्ष और नए सदस्य की नियुक्ति से आयोग की कार्यप्रणाली को मजबूती मिलेगी, लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और विभिन्न विभागों में प्रस्तावित भर्तियों की प्रक्रिया भी गति पकड़ने की उम्मीद है। इससे लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं का इंतजार कर रहे युवाओं को भी बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

