उत्तराखंड: दुर्घटना पीड़ितों को अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज, सीएम धामी ने दिए निर्देश

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देहरादून। सड़क हादसों के बाद घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना से प्रभावित व्यक्तियों का आयुष्मान योजना से आच्छादित अस्पतालों के साथ-साथ अन्य अस्पतालों में भी कैशलेस उपचार सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए परिवहन और स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के पश्चात घायल को अस्पताल तक पहुंचाने में रिस्पांस टाइम को हर हाल में कम किया जाए। सचिवालय में मंगलवार को हुई सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में उन्होंने प्रदेश में दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

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सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान
मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि यातायात नियमों के उल्लंघन को रोका जा सके। उन्होंने एआई एवं तकनीक आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

2026 तक सभी सड़कों पर क्रैश बैरियर
सीएम ने मार्च 2026 तक प्रदेश की सड़कों पर शत-प्रतिशत क्रैश बैरियर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया। साथ ही जिला सड़क सुरक्षा समितियों को इन क्रैश बैरियर की गुणवत्ता की नियमित जांच करने को कहा।

आईएसबीटी में खुद उठाई झाड़ू
मुख्यमंत्री ने बस अड्डों में स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए। बैठक के बाद उन्होंने आईएसबीटी देहरादून का औचक निरीक्षण किया और वहां खुद झाड़ू लगाकर स्वच्छता की मिसाल पेश की।

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ब्लैक स्पॉट सुधार और चौड़ीकरण कार्य तेजी से पूरे हों
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर सड़क चौड़ीकरण के कार्य प्राथमिकता के साथ पूरे किए जाएं। इसके अलावा आमजन को दुर्घटना के समय त्वरित सहायता उपलब्ध कराने हेतु फर्स्ट रिस्पांडर ट्रेनिंग प्रोग्राम को नियमित चलाने को कहा।

यात्रा सीजन को देखते हुए यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश
आगामी शीतकालीन यात्रा, चारधाम यात्रा और नंदा देवी राजजात के मद्देनज़र यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश भी बैठक में दिए गए।

बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
108 एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम कम करने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए।
नमी एवं जल प्रवाह वाले स्थलों पर डामर की जगह कंक्रीट पैच बनाए जाएं।
गन्ना पेराई सत्र से पहले किसानों को ढुलाई के दौरान सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए।
नए मानकों के तहत दुर्घटना संभावित स्थलों का त्वरित चिह्नीकरण।
मार्गों पर गति सीमा तय करने का कार्य शीघ्र पूरा किया जाए और सूचना पट्ट लगाए जाएं।
हिट एंड रन के मामलों का समयबद्ध निस्तारण।
वन विभाग सड़कों के किनारे बांस के वृक्ष लगाए।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए विस्तृत नियमावली तैयार की जाए।

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