ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: ‘समझौता टूटा तो होगा भीषण हमला’, पश्चिम एशिया में फिर भड़का तनाव

खबर शेयर करें

वॉशिंगटन/तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि जब तक “असली समझौता” पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक अमेरिकी सेना और उसके घातक हथियार ईरान को घेरे रहेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि ईरान ने अपने वादों से पीछे हटने की कोशिश की, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे।

यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी सीजफायर की घोषणा हुई थी, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास और तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर समझौता टूटा तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक आक्रामक कार्रवाई कर सकता है।

यह भी पढ़ें 👉  Uttarakhand: यूकेएसएसएससी ने बदला भर्ती परीक्षाओं का कार्यक्रम, चार परीक्षाओं का संशोधित कैलेंडर जारी...जानें नई तिथियां

इससे पहले भी ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान को चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर इस अहम समुद्री मार्ग को नहीं खोला गया, तो बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। माना जा रहा है कि ताजा बयान ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने की अनुमति नहीं देगा और क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील पर ब्रेक, 23 फरवरी की अहम बैठक टली

इधर, पूरे पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस ने लेबनान पर हो रहे भारी इस्राइली हवाई हमलों को “भयावह मौत और विनाश” करार दिया है और कड़ी नाराजगी जताई है।

बताया जा रहा है कि इस्राइल की वायुसेना ने बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हमले किए, जिनमें आम नागरिकों के घर, अस्पताल और रिहायशी क्षेत्र भी चपेट में आए। लेबनान की सिविल डिफेंस के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 254 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जबकि सैकड़ों लोग घायल हैं।

यह भी पढ़ें 👉  'हर हर महादेव' के नारों के बीच एनडीए की पहली बैठक, पीएम मोदी को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर बधाई

लगातार बढ़ते तनाव और हमलों ने पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट की स्थिति पैदा कर दी है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास हालात को संभाल पाएंगे या पश्चिम एशिया एक बड़े टकराव की ओर बढ़ रहा है।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page