होर्मुज पर ‘ट्रंप’ का दावा! नाम बदलने की पोस्ट से मचा बवाल, वैश्विक तेल संकट के बीच नई तनातनी

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वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक ऐसी पोस्ट री-शेयर की है, जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया है। इस पोस्ट में दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Hormuz Strait को “ट्रंप जलडमरूमध्य” के रूप में दिखाया गया है। हालांकि, जिस मूल पोस्ट को ट्रंप ने साझा किया था, वह अब प्लेटफॉर्म पर दिखाई नहीं दे रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट का केंद्र बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव ने इस समुद्री मार्ग को रणनीतिक और आर्थिक रूप से और भी संवेदनशील बना दिया है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ओमान की खाड़ी और ईरान के बीच स्थित है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की “लाइफलाइन” माना जाता है। दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और तेल की कीमतों पर पड़ता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य को बंद करने के बाद वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा। इसके जवाब में अमेरिका ने भी यहां सख्त नाकाबंदी लागू कर दी, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। नतीजतन, दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

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इस बीच, संघर्षविराम के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। ईरान ने समझौते के तहत होर्मुज को खोलने का प्रस्ताव दिया, लेकिन Donald Trump ने इसे खारिज कर दिया। ट्रंप ने नाकाबंदी को सही ठहराते हुए कहा कि “नाकाबंदी, बमबारी से ज्यादा प्रभावी है” और इससे ईरान पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है।

ट्रंप का दावा है कि इस रणनीति से ईरान की तेल निर्यात क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है और उसके ऊर्जा केंद्र बंद होने की कगार पर हैं। वहीं अमेरिका की प्राथमिक मांग ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद कराना है, जिस पर वह किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहा।

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हालांकि, ट्रंप द्वारा होर्मुज का नाम बदलने जैसी पोस्ट को री-शेयर करना कूटनीतिक मर्यादाओं से अलग कदम माना जा रहा है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान और प्रतीकात्मक कदम पहले से तनावग्रस्त हालात को और भड़का सकते हैं।

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