हल्द्वानी: कुमाऊं मंडल में टैक्स चोरी को लेकर जो तस्वीर सामने आ रही है, वह बेहद चौंकाने वाली और सिस्टम पर सीधे सवाल खड़े करने वाली है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं मानो “सैयां भए कोतवाल, अब डर काहे का” सिर्फ कहावत नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुकी हो। सूत्रों के अनुसार हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर और किच्छा जैसे प्रमुख व्यापारिक शहरों में टैक्स चोरी का एक संगठित नेटवर्क बेखौफ सक्रिय है, जिससे सरकार को हर दिन भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस पूरे खेल में राज्य कर विभाग के कुछ कथित अधिकारियों की मिलीभगत बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि बाहर से आने वाला माल बिना वैध टैक्स चुकाए सीधे गोदामों तक पहुंचाया जा रहा है और फिर बाजार में खपाया जा रहा है। सवाल यह है कि अगर चेकिंग सिस्टम मौजूद है तो फिर यह माल बिना रोक-टोक अंदर कैसे आ रहा है?
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली, गाजियाबाद, बरेली और अन्य राज्यों से बड़े पैमाने पर माल ट्रकों के जरिए उत्तराखंड पहुंच रहा है। आरोप है कि बॉर्डर से लेकर गोदाम तक की पूरी चेन “सेट” है, जिसके चलते न तो सख्त जांच होती है और न ही कोई ठोस कार्रवाई नजर आती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पहले भी इस तरह के मामलों के सामने आने के बाद शासन स्तर पर सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालात यह हैं कि टैक्स चोरी का यह खेल रुकने के बजाय और ज्यादा तेजी से फैलता नजर आ रहा है।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए कथित तौर पर “मासिक सिस्टम” काम करता है, जिसमें मोटी रकम ऊपर तक पहुंचाई जाती है। यही वजह बताई जा रही है कि कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा है और अवैध कारोबार बिना किसी डर के जारी है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही जानकारियां कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं—क्या सिस्टम वाकई नाकाम हो चुका है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?
अगर इन दावों में जरा भी सच्चाई है, तो यह सिर्फ टैक्स चोरी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े स्तर के भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर सरकारी खजाने और आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अब नजर इस बात पर है कि क्या इस पूरे मामले में कोई ठोस और निष्पक्ष जांच होती है या फिर यह ‘टैक्स माफिया’ यूं ही फलता-फूलता रहेगा।

