होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर बढ़ा तनाव, तेल टैंकर पर हमले के बाद अमेरिका-ईरान आमने-सामने…ऊर्जा संकट की आशंका गहराई

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नई दिल्ली। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच महज 10 दिन पहले हुआ अंतरिम शांति समझौता अब टूटता नजर आ रहा है। शनिवार को एक तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर मिसाइल या गोले से हमला किया गया, जिससे जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा। हालांकि, सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। घटना के बाद जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने क्षेत्र में सुरक्षा खतरे का स्तर बढ़ा दिया है।

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तनाव की शुरुआत गुरुवार को एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले से हुई थी। इसके बाद शनिवार को अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर जवाबी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेना ने रातभर ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जबकि ईरान ने अमेरिकी हितों और ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान हिंसा का रास्ता अपनाएगा तो उसे उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने अमेरिका पर क्षेत्रीय छद्म बलों को समर्थन देकर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

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इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करने के संकेत दिए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने निर्धारित मार्गों का पालन नहीं करने वाले जहाजों पर चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं और संकेत दिया कि अब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी अनुमति लेनी पड़ सकती है।

क्षेत्रीय तनाव केवल खाड़ी तक सीमित नहीं है। ईरान ने लेबनान में युद्धविराम लागू न करा पाने के लिए भी अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच हुए नए शांति समझौते के बावजूद नबातियेह क्षेत्र में ड्रोन हमले की खबरें सामने आई हैं। हिजबुल्ला नेता नईम कासिम ने भी इस समझौते को खारिज कर दिया है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। पिछले दो सप्ताह में हालात सामान्य होने से कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर के करीब लौट आई थीं, लेकिन ताजा घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फिर अनिश्चितता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है या जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, माल ढुलाई लागत और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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