गणतंत्र दिवस परेड में कर्त्तव्य पथ पर दिखेगी उत्तराखंड की झांकी, सांस्कृतिक विरासत और साहसिक खेलों का होगा प्रदर्शन

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देहारादून। गणतंत्र दिवस परेड में इस बार कर्त्तव्य पथ पर उत्तराखंड की झांकी राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और साहसिक खेलों का अद्भुत समन्वय पेश करेगी। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में उत्तराखंड के कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में झांकी की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक और नोडल अधिकारी केएस चौहान के नेतृत्व में झांकी का निर्माण किया गया है। चौहान ने बताया कि इस वर्ष झांकी की थीम ‘सांस्कृतिक विरासत एवं साहसिक खेल’ पर आधारित है।

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झांकी में सबसे आगे उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला को दर्शाया गया है। इसमें एक महिला को पारंपरिक वेशभूषा में ऐपण बनाते हुए दिखाया गया है। चावल के आटे और गेरू से बनाई जाने वाली यह कला राज्य की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है और अब विश्वभर में प्रसिद्ध हो चुकी है।

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झांकी के दूसरे हिस्से में उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन का चित्रण किया गया है। इसमें नैनीताल और मसूरी में हिल साइकिलिंग, फूलों की घाटी और केदारकांठा की ट्रेकिंग, ओली में स्नो स्कीइंग, ऋषिकेश में बंजी जंपिंग, जिप-लाइनिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों को दिखाया गया है।

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गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड की झांकी कर्त्तव्य पथ पर मार्च पास्ट करते हुए चौथे नंबर पर दिखाई देगी। झांकी का उद्देश्य उत्तराखंड की अनूठी परंपराओं और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने रखना है।

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