मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति पर अमेरिकी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- ‘पिता की तरह ही होगा अंजाम’

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वॉशिंगटन। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुने जाने पर अमेरिका में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई अमेरिकी सीनेटरों ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह ईरान में उस तरह का बदलाव नहीं है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय उम्मीद कर रहा था।

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अली खामेनेई के बेटे को उनका उत्तराधिकारी बनाना किसी भी तरह से सकारात्मक बदलाव नहीं है। उन्होंने लिखा कि यह “सिर्फ समय की बात है” जब उनका भी वही अंजाम हो सकता है जो उनके पिता का हुआ। ग्राहम लंबे समय से ईरान के खिलाफ सख्त रुख और सैन्य कार्रवाई की वकालत करते रहे हैं।

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इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि इजरायली मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर फैसला अमेरिका और इजरायल मिलकर करेंगे।

ट्रंप ने The Times of Israel को दिए एक टेलीफोन इंटरव्यू में कहा कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत कर रहे हैं और सही समय आने पर निर्णय लिया जाएगा कि ईरान के साथ संघर्ष कब खत्म किया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतिम निर्णय वॉशिंगटन का होगा।

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उधर, पूर्व अमेरिकी खुफिया प्रमुख डेविड पेट्रियस ने भी मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि मोजतबा अपने पिता की तरह ही कट्टर विचारधारा वाले नेता हो सकते हैं और इससे ईरान की नीतियों में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम दिखाई देती है।

इसी बीच इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान में जो भी नेता इजरायल को खत्म करने की बात करेगा, वह इजरायल के निशाने पर होगा। वहीं इजरायली संसद Knesset के स्पीकर आमिर ओहाना ने भी कहा कि केवल व्यक्ति बदलने से सरकार की नीतियां नहीं बदलतीं और इजरायल नए नेतृत्व से भी उसी तरह निपटेगा जैसे पहले करता आया है।

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विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

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