कोच्चि बंदरगाह पर ईरानी युद्धपोत को मिली शरण, ईरान ने जताया आभार

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने एक अहम मानवीय और कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरान के युद्धपोत IRIS Lavan को केरल के Cochin Port में डॉक करने की अनुमति दी। भारत के इस फैसले पर ईरान ने आभार व्यक्त करते हुए इसे “मानवीय कदम” बताया है।

इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी विदेश मंत्री S. Jaishankar ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और ऐसे समय में भारत संतुलित कूटनीति और मानवीय दृष्टिकोण के साथ फैसले ले रहा है।

तकनीकी खराबी के बाद भारत से मांगी मदद
विदेश मंत्री ने बताया कि ईरानी नौसेना का जहाज क्षेत्र में मिशन के दौरान तकनीकी समस्या से जूझ रहा था। इसी दौरान श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने की घटना भी सामने आई थी। इस घटनाक्रम के बीच ईरानी नौसेना ने भारत से सहायता का अनुरोध किया।

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जयशंकर ने बताया कि ईरान ने 20 फरवरी 2026 को इस क्षेत्र में मौजूद अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी। भारत सरकार ने हालात का आकलन करने के बाद 1 मार्च को इसकी मंजूरी दे दी। इसके बाद IRIS Lavan 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा।

भारतीय नौसेना की निगरानी में है क्रू
विदेश मंत्री ने कहा कि जहाज के क्रू को फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया है और आवश्यक तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने यह फैसला पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया है।
उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस सहायता के लिए भारत सरकार का धन्यवाद किया है।

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ऊर्जा सुरक्षा और भारतीयों की सुरक्षा पर जोर
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क है और भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

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उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिए क्षेत्र के देशों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

भारत ने दोहराया शांति का संदेश
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा शांति और कूटनीतिक समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की।

उन्होंने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है—मानवता, शांति और राष्ट्रीय हित, तीनों को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लिए जाएंगे।

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