रियाद। सऊदी अरब के प्रमुख तेल एवं औद्योगिक केंद्र रास तनुरा से रविवार सुबह एक दुखद खबर सामने आई। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की पुष्टि सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से की है।
सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के अनुसार, यह हादसा रविवार सुबह करीब छह बजे रास तनुरा क्षेत्र में हुआ। हेलीकॉप्टर में सवार सभी 14 लोग सऊदी अरब के नागरिक थे। दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन किसी को भी बचाया नहीं जा सका।
हादसे की जांच शुरू, कारणों का अभी नहीं चला पता
ऊर्जा मंत्रालय ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। मंत्रालय के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद संबंधित एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया और हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
फिलहाल प्रशासन ने हेलीकॉप्टर के मॉडल, उड़ान के उद्देश्य और दुर्घटना के कारणों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस हादसे का अरामको के तेल उत्पादन या परिचालन पर कोई असर पड़ा है या नहीं।
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है सऊदी अरामको
सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों में शामिल है और इसका स्वामित्व सऊदी अरब सरकार के पास है। देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा इसी कंपनी से आता है।
कंपनी की स्थापना वर्ष 1933 में अमेरिकी कंपनियों के साथ हुए समझौते के तहत हुई थी। बाद में 1980 में सऊदी सरकार ने इसका पूर्ण स्वामित्व अपने हाथ में ले लिया। कंपनी का मुख्यालय धहरान में स्थित है।
दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार का संचालन
अरामको दुनिया के सबसे बड़े पारंपरिक तेल क्षेत्र ‘गवार’ का संचालन करती है। कंपनी प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अहम भूमिका निभाती है।
कच्चे तेल के उत्पादन के अलावा कंपनी रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स और प्राकृतिक गैस के कारोबार में भी अग्रणी है। वर्ष 2019 में अरामको का आईपीओ दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम (IPO) माना गया था।
स्वच्छ ऊर्जा पर भी बढ़ा रही निवेश
पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ सऊदी अरामको अब रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर जैसी आधुनिक तकनीकों में भी बड़े स्तर पर निवेश कर रही है, ताकि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना किया जा सके।

