Haldwani: रेल परियोजना पर रेल मंत्रालय के जवाब से उठे सवाल, आरटीआई कार्यकर्ता बोले– गोलमोल सूचना देकर टाली जवाबदेही

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हल्द्वानी। नैनीताल तक रेल सेवा शुरू करने की बहुप्रतीक्षित परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला परियोजना की प्रगति नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी पर रेल मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब को लेकर है। आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया ने आरोप लगाया है कि रेल मंत्रालय ने उनके आवेदन में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्नों का बिंदुवार उत्तर देने के बजाय केवल दो पुराने पत्र संलग्न कर औपचारिक जवाब भेज दिया, जिससे सूचना के अधिकार अधिनियम की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

गौनिया के अनुसार उन्होंने हल्द्वानी–काठगोदाम–नैनीताल रेल परियोजना से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इनमें अब तक परियोजना के लिए कितनी बार निरीक्षण हुआ, सर्वेक्षण पर कितना सरकारी धन खर्च किया गया, वर्तमान प्रगति क्या है, परियोजना किन कारणों से लंबित है, अब तक कितनी बैठकें हुईं, किस स्तर पर निर्णय लिए गए और नैनीताल तक ट्रेन संचालन की संभावित समय-सीमा क्या है जैसे प्रश्न शामिल थे। उनका आरोप है कि इन सवालों का अलग-अलग उत्तर देने के बजाय विभाग ने केवल दो पत्रों की प्रतियां भेजकर मामले को निपटाने की कोशिश की।

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रेल मंत्रालय की ओर से भेजे गए उत्तर में केवल इतना उल्लेख किया गया कि काठगोदाम–नैनीताल नई रेल लाइन का सर्वे वर्ष 2010 में स्वीकृत हुआ था। परियोजना की लंबाई लगभग 133.80 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत ₹8,805.97 करोड़ आंकी गई है। परियोजना का रेट ऑफ रिटर्न (आरओआर) माइनस 4.93 प्रतिशत है, जबकि रेलवे बोर्ड की नीति के अनुसार 10 प्रतिशत या उससे अधिक रिटर्न वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त आवेदन में पूछे गए अन्य प्रश्नों पर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

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आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि लोक सूचना अधिकारी का दायित्व है कि आवेदन में पूछे गए प्रत्येक बिंदु का तथ्यात्मक और प्रमाणित उत्तर उपलब्ध कराए, लेकिन विभाग ने न तो मूल आवेदन की प्रति उपलब्ध कराई और न ही प्रश्नवार जवाब दिया। उनका आरोप है कि यह सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की भावना के अनुरूप नहीं है।

हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि नैनीताल देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यदि यहां तक रेल सेवा शुरू होती है तो पर्यटन, व्यापार, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ मिलेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य कठिन पर्वतीय क्षेत्रों तक रेल पहुंच चुकी है, तो नैनीताल जैसी महत्वपूर्ण पर्यटन नगरी के लिए अब तक ठोस पहल क्यों नहीं हो सकी।

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूचना निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी कारण उन्होंने मामले में प्रथम अपील दायर कर आवेदन के प्रत्येक बिंदु का प्रश्नवार उत्तर, संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां तथा मूल आवेदन के संदर्भ सहित पूरी सूचना उपलब्ध कराने की मांग की है।

गौनिया ने स्पष्ट किया कि यदि प्रथम अपील के बाद भी संतोषजनक सूचना नहीं मिलती है तो मामला केंद्रीय सूचना आयोग तक ले जाया जाएगा। साथ ही संबंधित लोक सूचना अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।

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