Nainital: कुमाऊं विश्वविद्यालय की बड़ी कार्रवाई…59 कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस, प्रवेश प्रक्रिया में लापरवाही पर कुलपति नाराज

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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया के बीच प्रशासनिक लापरवाही पर कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान सिंह रावत ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रवेश समिति की बैठक में बड़ी संख्या में महाविद्यालयों की अनुपस्थिति और आवश्यक सूचनाएं समय पर उपलब्ध न कराने पर कुलपति ने 59 संबद्ध महाविद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

विश्वविद्यालय में आयोजित प्रवेश समिति की बैठक में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा की गई। इस दौरान समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण, विषयवार प्रवेश व्यवस्था, सीट निर्धारण, छात्र मार्गदर्शन और प्रवेश प्रक्रिया के प्रभावी संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में सामने आई खामियों पर कुलपति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विश्वविद्यालय की ओर से बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक में 59 महाविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। कुलपति ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसे समय में जब विश्वविद्यालय नए सत्र की प्रवेश व्यवस्था को सुचारु बनाने में जुटा है, संबंधित महाविद्यालयों का अनुपस्थित रहना उनकी जिम्मेदारियों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

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इतना ही नहीं, 43 महाविद्यालयों ने अब तक प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी और समन्वय के लिए नियुक्त किए जाने वाले अनिवार्य नोडल अधिकारियों की जानकारी भी विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार नोडल अधिकारी प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस संबंध में सूचना न भेजना भी गंभीर चूक माना जा रहा है।

कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय के निर्देशों की अनदेखी करना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है, जिससे नए शैक्षणिक सत्र के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने संबंधित महाविद्यालयों से स्पष्टीकरण तलब करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और छात्र हितों के अनुरूप संचालित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। कुलपति की इस सख्ती को विश्वविद्यालय में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रवेश प्रक्रिया की नियमित समीक्षा के साथ लापरवाही बरतने वाले संस्थानों के खिलाफ और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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