182 देशों में शांति का संदेश पहुंचाने पर श्री श्री रविशंकर को लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार

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बेंगलुरु। वैश्विक मानवतावादी, आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर को विश्व के 182 देशों में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के प्रसार में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रतिष्ठित लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान वर्ल्ड पीस फोरम द्वारा प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार श्री श्री रविशंकर के पिछले 45 वर्षों से जारी उन प्रयासों की वैश्विक मान्यता है, जिनके माध्यम से उन्होंने आंतरिक शांति, संघर्ष समाधान, मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का कार्य किया। इस दौरान उन्होंने दुनिया के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना, संवाद और मेल-मिलाप की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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पुरस्कार ग्रहण करते हुए गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने कहा कि दुनिया के अधिकांश संघर्षों की जड़ व्यक्ति के भीतर शांति का अभाव है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो संवाद को पुनर्जीवित कर सकें, विश्वास को बहाल कर सकें और लोगों के बीच पुल का काम करें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज में जहां भी विभाजन देखें, वहां एकता और संवाद के सेतु बनें।

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उन्होंने कहा कि शांति को निष्क्रियता नहीं समझना चाहिए। वास्तविक शांति तब जन्म लेती है जब व्यक्ति जागरूक होने के साथ-साथ सक्रिय भी हो। गुरुदेव ने कहा कि तनाव आज मानवता के सबसे बड़े शत्रुओं में से एक है और तनावमुक्त मन तथा हिंसामुक्त समाज ही स्थायी शांति की मजबूत नींव रख सकते हैं।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शांति को उतना ही महत्व मिलना चाहिए जितना सुरक्षा को दिया जाता है। उनके अनुसार दुनिया भर में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े पैमाने पर संसाधन खर्च किए जाते हैं, लेकिन शांति और मानवीय मूल्यों के विकास पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।

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लक्ज़मबर्ग शांति पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रदान किया जाता है जिन्होंने विश्व स्तर पर शांति, मेल-मिलाप और मानव गरिमा को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। श्री श्री रविशंकर को मिला यह सम्मान उनके वैश्विक शांति मिशन और मानव कल्याण के लिए किए गए दीर्घकालिक प्रयासों की महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

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