आइची नागोया: भारतीय मुक्केबाजी की स्टार खिलाड़ी लवलीना बोरगोहेन ने अपने 29वें जन्मदिन को यादगार बना दिया। 2 अक्टूबर को जन्मदिन मनाने वाली लवलीना ने इसी दिन एशियाई खेलों के रिंग में ऐसा पंच लगाया कि इतिहास उनके नाम दर्ज हो गया। आइची-नागोया एशियन गेम्स में महिलाओं के 75 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
इस जीत के साथ लवलीना ने न केवल एशियाई खेलों का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता, बल्कि 75 किग्रा वर्ग में भारत के लिए भी नया इतिहास रचा। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि 2014 में मैरी कॉम ने हासिल की थी।
रजत का बदला रंग, जन्मदिन पर मिला ‘गोल्डन गिफ्ट’
लवलीना ने पिछले एशियाई खेलों में 75 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता था। इस बार उन्होंने उसी पदक का रंग बदल दिया। फाइनल में चीन की बाओ जियी के सामने भारतीय मुक्केबाज ने संयम, अनुभव और रणनीति का शानदार प्रदर्शन किया।
मुकाबले में बाओ ने कई बार दूरी कम कर आक्रामक हमला करने की कोशिश की, लेकिन लवलीना ने खुद को नियंत्रण में रखा। उन्होंने सही मौकों का इंतजार किया और सटीक पंच लगाकर बढ़त बनाई। अंत में सभी पांचों जजों ने फैसला लवलीना के पक्ष में दिया और भारतीय मुक्केबाज ने 5-0 से मुकाबला जीत लिया।
सेमीफाइनल में भी दिखाया दम
फाइनल से पहले लवलीना को सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की नताल्या बोगदानोवा की चुनौती का सामना करना पड़ा था। बेहद करीबी मुकाबले में उन्होंने 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई थी। इस जीत के साथ वह लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनी थीं।
75 किग्रा वर्ग में भारत को पहली बार मिला सोना
लवलीना का स्वर्ण 75 किग्रा महिला मुक्केबाजी में भारत के लिए खास उपलब्धि है। इससे पहले इस वर्ग में भारत की महिला मुक्केबाजों ने एशियाई खेलों में कांस्य और रजत पदक जीते थे, लेकिन स्वर्ण नहीं आया था। लवलीना ने अब इस इंतजार को खत्म कर दिया।
उनकी उपलब्धि भारतीय महिला बॉक्सिंग के एशियाई खेलों के इतिहास में भी खास है। 2014 में मैरी कॉम ने 51 किग्रा वर्ग में भारत को पहला महिला बॉक्सिंग स्वर्ण दिलाया था। 12 साल बाद लवलीना ने 75 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतकर इस सूची में अपना नाम जोड़ दिया।
ओलंपिक कांस्य से विश्व चैंपियन बनने तक का सफर
असम के गोलाघाट जिले के बड़ामुखिया गांव से आने वाली लवलीना पहले ही भारतीय मुक्केबाजी में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने 2018 और 2019 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने 69 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत की ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाजों की सूची में जगह बनाई। इसके बाद 75 किग्रा वर्ग में उन्होंने अपना सफर आगे बढ़ाया और 2023 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
अब एशियाई खेलों का स्वर्ण भी उनके खाते में जुड़ गया है। जन्मदिन के दिन मिली यह जीत उनके करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गई है।
भारत की पदक तालिका में भी इजाफा
लवलीना के स्वर्ण के साथ एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 12 हो गई। दिन के अपडेट के अनुसार भारत के खाते में कुल 70 पदक—12 स्वर्ण, 24 रजत और 34 कांस्य दर्ज थे।
लवलीना की जीत ने भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। जन्मदिन पर जीता यह स्वर्ण उनके लिए सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि रिंग में वर्षों की मेहनत और संघर्ष का यादगार परिणाम बन गया।

