भारत ने यूएससीआईआरएफ रिपोर्ट को बताया पक्षपातपूर्ण, तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप

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नई दिल्ली। भारत ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य आयोग (यूएससीआईआरएफ) की ताजा रिपोर्ट को एक बार फिर खारिज कर दिया है। बुधवार को विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी एजेंसी लगातार पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित आकलन पेश कर रही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट भारत के बहुलतावाद और धार्मिक सहिष्णुता की वास्तविकता को नजरअंदाज करने की एक और कोशिश है। यह भारत के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने का जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है।”

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भारत ने अतीत में भी यूएससीआईआरएफ की रिपोर्टों पर सवाल उठाए हैं और इन्हें प्रेरित एजेंडे से प्रभावित बताया है। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक और बहुसांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने के प्रयास सफल नहीं होंगे।

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यह पहली बार नहीं है जब भारत ने यूएससीआईआरएफ की आलोचना की हो। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने लगातार इस आयोग की रिपोर्टों को खारिज किया है, चाहे वह कोविड-19, नागरिकता संशोधन विधेयक या दिल्ली दंगों से जुड़ी रही हों।

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आपको क्या लगता है, क्या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ऐसी रिपोर्टों का असर किसी देश की छवि पर पड़ता है, या यह केवल राजनयिक चर्चाओं तक सीमित रहता है?

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