Haldwani: महिला अस्पताल के कनेक्टिंग ब्रिज पर हाईकोर्ट की नजर, स्वास्थ्य सचिव को भेजा मामला

खबर शेयर करें

समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया की शिकायत पर मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी के बाद कार्रवाई, आरटीआई से सामने आया पूरा प्रशासनिक रिकॉर्ड

हल्द्वानी/नैनीताल। हल्द्वानी के महिला चिकित्सालय में निर्माणाधीन 50 बेड की मातृ एवं शिशु कल्याण (एमसीएच) यूनिट में पुराने और नए अस्पताल भवन के बीच कनेक्टिंग ब्रिज, सुरक्षित आवागमन मार्ग, पार्किंग समेत जरूरी सुविधाओं की कमी का मामला अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत सिंह गौनिया की शिकायत पर हाईकोर्ट स्तर से महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई हुई है।

उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों के मुताबिक, शिकायत पर मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति के बाद मामला स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) की ओर से स्वास्थ्य सचिव, उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर मामले में “Further Needful” यानी आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल को भी दी गई है।

13.42 करोड़ की लागत से बन रही एमसीएच यूनिट पर उठे सवाल

हेमंत सिंह गौनिया ने 1 जून 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट को भेजी शिकायत में बताया था कि महिला चिकित्सालय में करीब 13.42 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2022 से मातृ एवं शिशु कल्याण यूनिट का निर्माण किया जा रहा है। आरोप है कि नए और पुराने अस्पताल भवन के बीच कनेक्टिंग ब्रिज का निर्माण नहीं किया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: स्वास्थ्य विभाग में 287 डॉक्टरों की भर्ती जल्द, शासन ने भेजा प्रस्ताव

शिकायत में अस्पताल परिसर में सुरक्षित आवागमन मार्ग, पार्किंग और अन्य जरूरी मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया गया। शिकायतकर्ता का कहना था कि महिला अस्पताल कुमाऊं का प्रमुख मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं, प्रसूताएं और नवजात उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में एसएनसीयू भी संचालित है।

ऐसे में पुराने और नए भवन के बीच सुरक्षित संपर्क मार्ग नहीं होने को गंभीर चिंता का विषय बताया गया। शिकायत में आशंका जताई गई कि आपात स्थिति में मरीजों को एक भवन से दूसरे भवन में स्थानांतरित करने के दौरान परेशानी और जोखिम पैदा हो सकता है।

अनुच्छेद-21 का हवाला, सुविधाएं पूरी होने तक संचालन रोकने की मांग

गौनिया ने अपनी शिकायत में संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार का हवाला देते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। शिकायत में कनेक्टिंग ब्रिज, सुरक्षित आवागमन मार्ग, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने की मांग की गई।

इसके साथ ही निर्माण कार्य की जांच, सुविधाओं में कथित कमी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा आवश्यक सुविधाएं पूरी होने तक भवन का पूर्ण संचालन नहीं किए जाने की मांग भी उठाई गई थी।

यह भी पढ़ें 👉  इंस्टाग्राम पर पुलिस को दी थी चुनौती, हरिद्वार से दबोची गई महिला लुटेरी

16 जुलाई को मिली मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी

हाईकोर्ट के उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, शिकायत पर 16 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके बाद 20 जुलाई 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) धीरेंद्र भट्ट ने पत्र संख्या 4956 जारी किया।

इस पत्र के माध्यम से शिकायत की प्रति सचिव, स्वास्थ्य विभाग, उत्तराखंड शासन, देहरादून को भेजी गई और मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा गया। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नैनीताल और शिकायतकर्ता हेमंत सिंह गौनिया को भी सूचना के लिए भेजी गई।

आरटीआई से सामने आया हाईकोर्ट की कार्रवाई का रिकॉर्ड

मामले में शिकायतकर्ता की ओर से दाखिल आरटीआई आवेदन के बाद हाईकोर्ट प्रशासनिक अनुभाग ने 23 जुलाई 2026 की कार्यालय टिप्पणी में स्पष्ट किया कि मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति के बाद स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा जा चुका है और शिकायतकर्ता को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। इसके आधार पर राज्य लोक सूचना अधिकारी को आरटीआई आवेदन का जवाब उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

इसके बाद 4 अगस्त 2026 को राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं संयुक्त निबंधक हर्ष सिंह जीना की ओर से आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत शिकायतकर्ता को आधिकारिक जवाब भेजा गया। जवाब के साथ संबंधित कार्यालय से प्राप्त सूचना और अभिलेख भी उपलब्ध कराए गए। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद शिकायत पर हाईकोर्ट स्तर से हुई पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया स्पष्ट हो गई।

यह भी पढ़ें 👉  Board Exam 2026: 20 अप्रैल तक आएगा उत्तराखंड बोर्ड का रिजल्ट, 39 संकलन और 29 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए

हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को भेजा मामला, अब आगे की कार्रवाई पर नजर

उपलब्ध चार आधिकारिक पत्रों के अध्ययन से यह स्पष्ट है कि हाईकोर्ट प्रशासन ने शिकायत को मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति के बाद स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा है। साथ ही नैनीताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी इसकी सूचना दी गई है।

हालांकि, उपलब्ध अभिलेखों में स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई के बाद अनुपालन रिपोर्ट या एक्शन टेकन रिपोर्ट हाईकोर्ट में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने का कोई स्पष्ट निर्देश दर्ज नहीं है। हाईकोर्ट की ओर से जारी पत्र में शिकायत को सक्षम प्राधिकारी को “Further Needful” के लिए अग्रेषित किया गया है।

अब स्वास्थ्य विभाग के फैसले पर टिकी निगाहें

फिलहाल मामला उत्तराखंड शासन के स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर है। अब देखना होगा कि विभाग महिला अस्पताल की एमसीएच यूनिट से जुड़े कनेक्टिंग ब्रिज, सुरक्षित आवागमन, पार्किंग और अन्य सुविधाओं को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है।

ADVERTISEMENTS Ad

You cannot copy content of this page