नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को एक बार फिर भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार शुरू होते ही बाजार पर दबाव नजर आया और दिन के शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 23,200 के स्तर तक फिसल गया, जबकि सेंसेक्स भी 700 अंकों से ज्यादा नीचे चला गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 1 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, फाइनेंशियल और इंश्योरेंस शेयरों पर दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। वहीं घरेलू स्तर पर इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े प्रस्तावित नियामकीय बदलावों ने भी चुनिंदा शेयरों पर दबाव बनाया।
गुरुवार की बिकवाली का असर बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्यांकन पर भी साफ दिखाई दिया। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4,85,01,353.855 करोड़ से घटकर ₹4,80,68,443.14 करोड़ रह गया। यानी करीब ₹4,32,910.715 करोड़ यानी लगभग ₹4.33 लाख करोड़ की कमी आई।
हालांकि, मार्केट कैप में इतनी बड़ी गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि निवेशकों के खातों से सीधे ₹4.33 लाख करोड़ की नकदी निकल गई। शेयरों की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनियों का बाजार मूल्यांकन कम हुआ, जिससे कुल मार्केट कैप घट गया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और महंगे क्रूड ने बढ़ाई चिंता
भारतीय बाजार पर दबाव की प्रमुख वजहों में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में तेजी से वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की आकर्षकता बढ़ सकती है। इससे उभरते बाजारों में निवेश को लेकर निवेशकों के रुख में बदलाव देखने को मिल सकता है।
दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता बढ़ी है। महंगे तेल का असर देश के आयात बिल, महंगाई, रुपये की चाल और कई उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
खास बात यह है कि महंगे क्रूड के साथ अगर डॉलर भी मजबूत रहता है तो भारत के लिए दबाव और बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का कारोबार मुख्य रूप से डॉलर में होता है। ऐसे में डॉलर की मजबूती और तेल की ऊंची कीमतें मिलकर रुपये के लिहाज से आयात लागत बढ़ा सकती हैं।
बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली
गुरुवार को बाजार की कमजोरी में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों की भी बड़ी भूमिका रही। Bajaj Finance, Axis Bank, HDFC Bank और Kotak Mahindra Bank समेत कई प्रमुख वित्तीय शेयरों पर दबाव देखने को मिला। बड़े बैंकिंग शेयरों में गिरावट का सीधा असर प्रमुख बाजार सूचकांकों पर पड़ता है।
इंश्योरेंस सेक्टर भी बिकवाली से अछूता नहीं रहा। बाजार में IRDAI के प्रस्तावित बदलावों को लेकर चिंता देखने को मिली। कंसल्टेशन पेपर में इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन और कंपनियों से जुड़े खर्चों के नियमों में संभावित बदलावों पर चर्चा की गई है।
बाजार में आशंका है कि प्रस्तावित बदलावों का असर बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की लागत, कमीशन और कारोबार के मौजूदा ढांचे पर पड़ सकता है। हालांकि, ये अभी प्रस्तावित बदलाव हैं और इन्हें अंतिम नियम नहीं माना जा सकता।
एक्सपायरी ने भी बढ़ाई बाजार की हलचल
गुरुवार के कारोबार में डेरिवेटिव्स सेगमेंट की एक्सपायरी भी महत्वपूर्ण रही। एक्सपायरी के दौरान ट्रेडर्स अपनी पोजीशन एडजस्ट करते हैं, जिसके कारण बाजार में सामान्य दिनों के मुकाबले उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
पहले से ही वैश्विक बाजारों में दबाव और घरेलू स्तर पर सेक्टर आधारित चिंताओं के बीच एक्सपायरी से जुड़ी ट्रेडिंग गतिविधियों ने बाजार की चाल को और अस्थिर बनाया।
कुल मिलाकर गुरुवार की गिरावट को किसी एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, महंगा कच्चा तेल, डॉलर की मजबूती, वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बैंकिंग-इंश्योरेंस शेयरों में घरेलू बिकवाली—इन सभी का असर एक साथ दिखाई दिया।
अब बाजार की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और IRDAI के प्रस्तावित नियमों पर रहेगी। इन संकेतकों में होने वाला बदलाव आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
गुरुवार की गिरावट ने एक बार फिर साफ कर दिया कि वैश्विक आर्थिक संकेतों के साथ-साथ घरेलू सेक्टर-स्पेसिफिक खबरें भी भारतीय शेयर बाजार की चाल पर बड़ा असर डाल रही हैं।
