उत्तराखंड में हीट वेव को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में बनेंगे हीटस्ट्रोक कक्ष

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देशों के बाद उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने संभावित हीट वेव और भीषण गर्मी से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को एडवाइजरी जारी कर हीट-सम्बंधित बीमारियों की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

भारतीय मौसम विभाग द्वारा मार्च से मई के बीच सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। राज्य सरकार का लक्ष्य हीट स्ट्रोक और उससे होने वाली मौतों को न्यूनतम करना है।

अस्पतालों में विशेष इंतजाम के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला और उप-जिला अस्पतालों में विशेष हीटस्ट्रोक कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इन कक्षों में कूलिंग सिस्टम, आइस पैक, ठंडे IV फ्लूइड और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए “पहले ठंडा करें, फिर परिवहन करें” प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।

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इसके साथ ही अस्पतालों में ORS, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की तैनाती पर भी जोर दिया गया है।

रोजाना होगी निगरानी और रिपोर्टिंग

हीट वेव के प्रभाव की निगरानी के लिए 1 मार्च 2026 से दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। सभी जिला इकाइयों को IHIP प्लेटफॉर्म पर हीट-सम्बंधित मामलों की रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। संदिग्ध मौतों की जांच और ऑडिट भी कराया जाएगा।

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स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि डेटा की गुणवत्ता और समय पर रिपोर्टिंग में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

संवेदनशील वर्गों पर विशेष फोकस

एडवाइजरी में शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों को सबसे अधिक संवेदनशील वर्ग माना गया है। इनके लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने, हल्के सूती कपड़े पहनने और अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है। ठंडे इलाकों से आने वाले लोगों को 10-15 दिन का अनुकूलन समय देने की भी सलाह दी गई है।

सार्वजनिक आयोजनों के लिए भी सख्त गाइडलाइन

गर्मी के मौसम में आयोजित होने वाले सामूहिक कार्यक्रमों और खेल गतिविधियों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दोपहर के समय बाहरी आयोजनों से बचने, पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था करने और बड़े आयोजनों में चिकित्सा टीमों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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अग्नि सुरक्षा पर भी बढ़ाई सतर्कता

बढ़ते तापमान के कारण बिजली उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव को देखते हुए अस्पतालों में विद्युत लोड ऑडिट, स्मोक डिटेक्टर और फायर फाइटिंग सिस्टम की कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं एनएचएम मिशन निदेशक मनुज गोयल ने बताया कि राज्यभर में माइक्रो-लेवल प्लानिंग की जा रही है और सभी स्वास्थ्य इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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