लामाचौड़ की ग्राम दुकान बनी महिलाओं की आत्मनिर्भरता का केंद्र, 65 से अधिक महिलाएं दीपावली के बाजार में उतरीं, ऑनलाइन मिल रहे ऑर्डर, बढ़ रही आमदनी
हल्द्वानी। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। इस बार बाजार की चमक कुछ खास है, क्योंकि घरों को रोशन करने वाली झालरों और सजावटी सामान के पीछे स्थानीय महिलाओं का हुनर और मेहनत भी शामिल है। नैनीताल जिले के लामाचौड़ में महिलाएं पारंपरिक ऐपण कला के साथ आधुनिक LED झालर और मालाएं तैयार कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
गिरिजा बुटीक एवं महिला विकास संस्था की अध्यक्ष गीता सत्यवली ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से लामाचौड़ में संचालित ग्राम दुकान में महिलाएं पिछले दो महीने से दीपावली के उत्पाद तैयार करने में जुटी हैं। नाबार्ड की ओर से निशुल्क LED प्रशिक्षण मिलने के बाद महिलाओं ने झालर और आकर्षक मालाएं बनाना शुरू किया है। इससे उनके हुनर को नया आयाम मिलने के साथ ही आमदनी के अवसर भी बढ़े हैं।
65 से अधिक महिलाओं के हाथों में हुनर, दीपावली के ऑर्डर की धूम
रचिता समूह की अध्यक्ष पुष्पा बिष्ट ने बताया कि ग्राम दुकान से पांच से अधिक महिला समूह जुड़े हैं, जिनमें करीब 65 महिलाएं सामूहिक रूप से दीपावली की तैयारियों में जुटी हैं। इस बार ऐपण से बने उत्पादों, सजावटी दीयों, घड़ियों, चौकियों और मोमबत्तियों की काफी मांग है।
खास बात यह है कि महिलाएं अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी उन्हें ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे दीपावली का सीजन महिलाओं के लिए कमाई का अच्छा अवसर बनकर सामने आया है।
नाबार्ड की पहल से घर बैठे रोजगार, हुनर को मिला बाजार
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) मुकेश बेलवाल ने बताया कि नाबार्ड का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से जोड़ते हुए उन्हें स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। LED प्रशिक्षण और राज्य की पहली ग्राम दुकान के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ अपने उत्पादों के विपणन के लिए भी मंच मिला है।
उन्होंने बताया कि ग्राम दुकान के जरिए महिला समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध हो रहा है। इससे महिलाओं को घर के आसपास ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।
परंपरा और आधुनिकता का संगम बनी महिलाओं की पहल
इस दीपावली लामाचौड़ की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि हुनर को सही प्रशिक्षण और बाजार मिल जाए तो रोजगार के नए रास्ते खुद-ब-खुद खुल सकते हैं। एक ओर पहाड़ की पारंपरिक ऐपण कला लोगों को आकर्षित कर रही है, तो दूसरी ओर महिलाओं के हाथों से तैयार LED झालर और मालाएं घरों को रोशन करने के लिए तैयार हैं।

