महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत बनी चुनावी मुद्दा, शुरुआती नतीजों में रिपब्लिकन पिछड़े, संसद में बहुमत गंवाने का खतरा
वाशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव के शुरुआती नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शुरुआती परिणामों में डेमोक्रेटिक पार्टी कई अहम सीटों पर बढ़त बनाती नजर आ रही है। प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति ने रिपब्लिकन बहुमत के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। वहीं, सीनेट में भी कई मुकाबलों ने सत्ता संतुलन बदलने के संकेत दिए हैं।
चुनाव के शुरुआती रुझानों को ट्रंप सरकार के लिए जनता की नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। महंगाई, बढ़ती जीवनयापन लागत और सरकार की नीतियों को लेकर मतदाताओं में असंतोष चुनाव में प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। शुरुआती नतीजों से संकेत मिल रहे हैं कि इन मुद्दों का असर रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा है।
हाउस में डेमोक्रेट्स की मजबूत बढ़त
शुरुआती परिणामों के अनुसार, प्रतिनिधि सभा की घोषित सीटों में डेमोक्रेटिक पार्टी 127 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी थी, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 74 सीटें मिली थीं। सीनेट के शुरुआती परिणामों में डेमोक्रेट्स और उनके सहयोगियों को 46 सीटें, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 37 सीटें मिली थीं।
हालांकि, मतगणना जारी रहने के कारण इन आंकड़ों को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। कई अहम सीटों पर मुकाबला जारी है और अंतिम तस्वीर सामने आने में समय लग सकता है।
ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट बनी चुनौती
चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षणों में भी राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट के संकेत मिले थे। रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वेक्षण में उनकी अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वहीं, कांग्रेस चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को 46 प्रतिशत और रिपब्लिकन पार्टी को 38 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन मिलने का अनुमान जताया गया था।
महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ता खर्च मतदाताओं की चिंता का प्रमुख कारण रहा। चुनावी नतीजों में भी आर्थिक मुद्दों का प्रभाव दिखाई देने के संकेत मिल रहे हैं।
दो साल के लिए बदल सकता है सत्ता का समीकरण
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इसमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इन चुनावों के परिणाम राष्ट्रपति के अगले दो वर्षों के कार्यकाल में संसद के समर्थन की स्थिति तय करते हैं।
यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल करती है तो ट्रंप प्रशासन के विधायी एजेंडे पर उसका प्रभाव बढ़ सकता है। बजट, सरकारी नीतियों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर राष्ट्रपति को विपक्ष की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
शुरुआती नतीजों ने रिपब्लिकन पार्टी के सामने बहुमत बचाने की चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, अंतिम परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन किसके पक्ष में जाता है और ट्रंप के लिए आगामी दो वर्ष कितने चुनौतीपूर्ण होंगे।

