Haldwani: टीबी गंभीर जरूर, लेकिन पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी…लक्षण दिखें तो जांच में न करें देरी: प्रो. डॉ. नौटियाल

खबर शेयर करें

हल्द्वानी। टीबी (क्षय रोग) को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि यह एक गंभीर संक्रामक बीमारी होने के बावजूद पूरी तरह उपचार योग्य और रोकथाम योग्य है। समय पर पहचान और नियमित उपचार से मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है। यह बात राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के टीबी एवं श्वांस रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आर.जी. नौटियाल ने कही।

उन्होंने बताया कि टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, हालांकि यह शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होती है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या थूकने से हवा के माध्यम से फैलती है।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: खबर कवरेज के दौरान पत्रकार पर हमला, अस्पताल में भर्ती, पत्रकारों में आक्रोश

प्रो. नौटियाल ने कहा कि जानकारी के अभाव और सामाजिक संकोच के कारण कई लोग समय पर जांच नहीं करा पाते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बलगम में खून आना, सीने में दर्द, लगातार बुखार, रात में अत्यधिक पसीना, वजन में कमी, भूख न लगना या लगातार कमजोरी महसूस हो रही हो तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि टीबी का उपचार बीच में छोड़ना सबसे बड़ी गलती है। कई मरीज शुरुआती सुधार के बाद दवाएं लेना बंद कर देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा उभर सकती है और ड्रग रेजिस्टेंट टीबी विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए चिकित्सकों द्वारा निर्धारित दवाओं का पूरा कोर्स नियमित रूप से लेना अनिवार्य है।

यह भी पढ़ें 👉  Uttarakhand: गुंजन हत्याकांड में पुलिस की बड़ी कार्रवाई...एसआईटी ने दाखिल की चार्जशीट, 35 गवाह किए शामिल

स्वस्थ जीवनशैली से घटेगा टीबी का खतरा

प्रो. नौटियाल ने बताया कि संतुलित एवं पौष्टिक आहार, स्वच्छ और हवादार वातावरण, नियमित व्यायाम तथा मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता टीबी से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है और टीबी का जोखिम बढ़ाता है, इसलिए इनसे दूरी बनानी चाहिए।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल में समर कैंप का सफल आयोजन, बच्चों ने सीखी नई विधाएं

उन्होंने समाज से अपील की कि टीबी मरीजों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया न अपनाएं। यह बीमारी इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकती है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। परिवार और समाज का सहयोग मरीज के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उसके शीघ्र स्वस्थ होने में मददगार साबित होता है।

प्रो. नौटियाल ने कहा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी समय-समय पर टीबी उन्मूलन और जनजागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है। उन्होंने लोगों से सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क जांच और उपचार सुविधाओं का लाभ उठाने तथा टीबी के लक्षण दिखाई देने पर जांच में देरी न करने की अपील की।

ADVERTISEMENTS Ad

You cannot copy content of this page