Uttarakhand: केसीसी घोटाले में पूर्व बैंक मैनेजर को 4 साल की सजा, नौ कर्जदार भी दोषी करार

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देहरादून। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक बाजपुर शाखा में हुए करोड़ों रुपये के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) घोटाले में स्पेशल सीबीआई जज मदन राम की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बैंक के पूर्व प्रबंधक रामवतार सिंह दिनकर को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं इस मामले में शामिल नौ कर्जदारों को भी एक-एक साल की कैद और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

यह घोटाला वर्ष 2014-15 में सामने आया था और बीते एक सप्ताह में इसी प्रकरण से जुड़े तीन मामलों में सीबीआई कोर्ट सजा सुना चुकी है, जिनमें हर बार रामवतार सिंह दिनकर को चार-चार साल की सजा मिली है।

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सीबीआई के मुताबिक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के तत्कालीन महाप्रबंधक ने 31 मार्च 2017 को सीबीआई देहरादून शाखा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बाजपुर शाखा के तत्कालीन मैनेजर रामवतार सिंह दिनकर ने केजीएन ट्रैक्टर्स एंड इक्विपमेंट्स और अन्य लोगों के साथ मिलकर बैंक में वित्तीय अनियमितताएं कीं।

जांच में सामने आया कि अपात्र लोगों को नियमों के विरुद्ध किसान क्रेडिट कार्ड, फसल ऋण और कृषि टर्म लोन वितरित किए गए। इतना ही नहीं, कृषि टर्म लोन जारी करते समय जरूरी मार्जिन मनी भी जमा नहीं कराई गई, जबकि पूरी ऋण राशि ट्रैक्टर डीलर केजीएन ट्रैक्टर के खाते में भेज दी गई और बाद में उसे अन्य कार्यों में खर्च कर दिया गया। इस घोटाले से बैंक को करीब 4.81 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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सीबीआई के अधिवक्ता अमरेंद्र सिंह ने बताया कि अदालत में कुल 33 गवाहों के बयान और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर कोर्ट ने दोष सिद्ध मानते हुए फैसला सुनाया।

सजा पाने वाले कर्जदारों में दीदार सिंह, सतनाम सिंह, विनोद सिंह, इंदर प्रकाश सिंह, दीवान सिंह, मंगल सिंह, देवेंद्र सिंह, राजवंत सिंह और शेर सिंह शामिल हैं।

वहीं, इस मामले में आरोपी जागीर सिंह अदालत में पेश नहीं हुआ। बचाव पक्ष ने मौखिक रूप से कोर्ट को बताया कि उसकी सड़क हादसे में मौत हो चुकी है, लेकिन जब अदालत ने इसका प्रमाण मांगा तो कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इस पर अदालत ने जागीर सिंह के खिलाफ वारंट जारी कर दिया।

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सीबीआई अधिवक्ता के अनुसार, इस प्रकरण में कुल 18 आरोपी थे, जिनमें से मोहम्मद फुरकान, जागीर सिंह, दर्शन सिंह, अंग्रेज सिंह और अमरीक सिंह पहले ही अपना अपराध स्वीकार कर चुके थे, जिसके चलते उन्हें अलग कर पहले सजा सुनाई जा चुकी है। जबकि लच्छू सिंह और अब्दुल रशीद की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई थी।

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