बुशहर में अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर बढ़ा तनाव

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तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दक्षिणी प्रांत बुशहर में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली ने एक कथित अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाकर मार गिराया। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य गतिविधियां तेज होने से क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया कि बुशहर के पास ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने एक घुसपैठ करने वाले अमेरिकी ड्रोन को मिसाइल से इंटरसेप्ट किया। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई फारस की खाड़ी के ऊपर की गई और ड्रोन के मलबे की तलाश जारी है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी गतिविधियां

ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि सेना ने देश के दक्षिणी इलाकों से कुछ लक्ष्यों पर मिसाइलें दागीं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कुछ जहाजों को चेतावनी देने के लिए फायरिंग की गई। दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना ने होर्मुज क्षेत्र में चार ईरानी ड्रोन मार गिराए और बंदर अब्बास के पास एक ड्रोन नियंत्रण केंद्र पर कार्रवाई की।

बंदर अब्बास में धमाकों की खबर

गुरुवार तड़के ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास के पूर्वी हिस्से में कई धमाकों की सूचना दी। बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने दक्षिणी ईरान में एक सैन्य ठिकाने और ड्रोन नियंत्रण स्टेशन को निशाना बनाया था। अमेरिका ने इन हमलों को “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया है।

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युद्धविराम के बावजूद जारी हैं झड़पें

अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन उसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच कई बार सैन्य टकराव की घटनाएं सामने आई हैं। हालिया घटनाक्रम ने इस संघर्षविराम की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बातचीत जारी, लेकिन समाधान दूर

रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं में अपने फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड जारी करने की मांग उठाई है। वहीं दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं, क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

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