नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के धरना-प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपना लिया है। पार्टी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। दिल्ली पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने साफ किया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रदर्शन की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद धरना देने की कोशिश की गई तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने प्रेस वार्ता में बताया कि सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने प्रदर्शन के लिए आवेदन दिया था। पुलिस को सात अक्तूबर को इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ। नियमानुसार, किसी भी प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना जरूरी है। कम समय में आवेदन मिलने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं होने के कारण अनुमति देने से इनकार किया गया।
पुराने प्रदर्शन का भी दिया हवाला
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सीजेपी को पहले भी प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस दौरान पार्टी ने कानूनी निर्देशों और अपने आश्वासनों का पालन नहीं किया था। पुलिस ने इसे भी अनुमति नहीं देने की वजहों में शामिल किया है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
प्रदर्शन हुआ तो होगी कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली क्षेत्र में लागू बीएनएसएस की धारा 163 के तहत सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। प्रतिबंधों का उल्लंघन कर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के प्रदर्शन के ऐलान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनुमति नहीं मिलने के बावजूद पार्टी धरना देती है या अपना कार्यक्रम बदलती है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

